बैठे-बैठे बीमार हो रहे हैं आप? आयुर्वेद से जानिए फिटनेस का राज
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठना, मोबाइल या लैपटॉप पर लगातार काम करना, घर पर भी आरामदायक जगहों पर बैठकर टाइम बिताना, ये सब हमारी रोजमर्रा की आदतें बन गई हैं। शुरू में यह सब आरामदायक महसूस होता है, लेकिन धीरे-धीरे ये आदत हमारी सेहत पर बड़ा असर डालती है। मोटापा, पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द, ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं।
आयुर्वेद कहता है कि शरीर को सही मात्रा में गतिविधि की जरूरत होती है। अगर शरीर निष्क्रिय रहेगा तो वात, पित्त और कफ तीनों दोष असंतुलित हो जाते हैं। यही असंतुलन धीरे-धीरे कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। चरक संहिता में भी कहा गया है, 'व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्।' यानी व्यायाम से न केवल शरीर मजबूत होता है, बल्कि लंबी उम्र, बल और खुशी भी मिलती है।
कम चलने-फिरने से सबसे पहले मोटापा और मधुमेह बढ़ते हैं। लगातार बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, फैट जमा होने लगता है। इसके अलावा, रक्त संचार कम होने से हृदय और उच्च रक्तचाप की समस्या भी होती है। जोड़ों और स्नायु में जकड़न आने लगती है, जिससे गठिया और पीठदर्द की शिकायतें बढ़ती हैं। मानसिक रूप से भी नुकसान होता है। सक्रिय न रहने से सेरोटोनिन और डोपामिन हार्मोन कम बनते हैं, जिससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। पाचन संबंधी समस्याएं, कब्ज और गैस जैसी दिक्कतें भी आम हो जाती हैं।
आयुर्वेद में इसके समाधान भी बताए गए हैं। रोज सुबह 30 मिनट टहलना या दौड़ना, सूर्य नमस्कार करना, ताड़ासन, भुजंगासन और त्रिकोणासन जैसे आसान योगासन अपनाना बहुत फायदेमंद है। प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, कपालभाति और सूर्यभेदी से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है।
साथ ही हल्का, संतुलित और ताजगी से भरपूर आहार लेना चाहिए। दिन में छोटे-छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल, टीवी देखते समय स्ट्रेचिंग और हर घंटे में थोड़ी टहलना भी बहुत मदद करते हैं।
छोटे बदलाव, थोड़ी-सी सक्रियता और नियमित व्यायाम से न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा भी स्वस्थ रहते हैं। डिजिटल और तेज जिंदगी में भी ये आदतें अपनाकर आप बड़ी बीमारियों से खुद को बचा सकते हैं।
--आईएएनएस
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