आयुर्वेद और माइक्रोबायोम अनुसंधान पर आईटीआरए जामनगर में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित
जामनगर, 12 सितंबर (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए ), जामनगर में 9 से 11 सितंबर 2026 तक "माइक्रोबायोम अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य एवं कल्याण को समझना" विषय पर तीन दिवसीय गहन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को माइक्रोबायोम अनुसंधान के क्षेत्र में हो रहे नए विकास से परिचित कराना और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य, कल्याण और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी संभावित भूमिका को समझाना था।
कार्यशाला के दौरान आयुष मंत्रालय की डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट चेयर प्रो. शर्मिला मांडे और आईआईआईटी-दिल्ली की सहायक प्रोफेसर डॉ. तारिणी शंकर घोष ने विभिन्न सत्रों को संबोधित किया। उन्होंने माइक्रोबायोम विज्ञान से जुड़े आधुनिक सिद्धांतों, अनुसंधान पद्धतियों और उभरते वैज्ञानिक प्रमाणों पर अपने विचार साझा किए। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोबायोम अनुसंधान के संभावित प्रभावों को समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला में आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक माइक्रोबायोम विज्ञान के बीच संबंधों पर विशेष चर्चा हुई। इसमें आहार, पाचन, चयापचय (मेटाबॉलिज्म), स्वास्थ्य संवर्धन और व्यक्ति-विशिष्ट स्वास्थ्य एवं कल्याण संबंधी विषयों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ज्ञान विकसित करने और आयुर्वेद की वैज्ञानिक नींव को मजबूत बनाने के लिए अंतरविषयक तथा साक्ष्य-आधारित अनुसंधान बेहद आवश्यक है।
कार्यशाला का समापन आईटीआरए की निदेशक प्रो. तनुजा नेसरी के नेतृत्व में आयोजित विचार-विमर्श सत्र के साथ हुआ। इस दौरान सहयोगात्मक और बहु-केंद्रित अनुसंधान की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
सत्र में आयुर्वेद की प्रमुख अवधारणाओं जैसे अग्नि (पाचन एवं चयापचय), आहार, प्रकृति, स्वस्थ जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों का आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव समुदायों (गट माइक्रोबियल कम्युनिटीज) के साथ वैज्ञानिक अध्ययन करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
तीन दिवसीय इस कार्यशाला में कुल 52 शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम ने ज्ञान के आदान-प्रदान, वैज्ञानिक संवाद और भविष्य के सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए नए अवसरों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के बीच अंतरविषयक अनुसंधान को मजबूत करने में मदद करेगी। माइक्रोबायोम अनुसंधान आयुर्वेद की पारंपरिक अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने तथा निवारक स्वास्थ्य, पोषण, पाचन स्वास्थ्य, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित मॉडल विकसित करने की दिशा में नए अवसर प्रदान करता है।
आईटीआरए ने कहा कि यह कार्यशाला आयुर्वेद में साक्ष्य-आधारित, अंतरविषयक और जनस्वास्थ्य केंद्रित अनुसंधान को बढ़ावा देने के उसके लगातार प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित स्वास्थ्य एवं कल्याण संबंधी उपायों में परिवर्तित करना है।
--आईएएनएस
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