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अयोध्या : हिंदू नववर्ष समारोह में शामिल होने के लिए ट्रस्ट ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया निमंत्रण

अयोध्या, 21 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामजन्मभूमि परिसर में वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर 19 मार्च को आयोजित होने वाले नवसंवत्सर समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो सकती हैं। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिल्ली जाकर राष्ट्रपति को इस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
 
अयोध्या : हिंदू नववर्ष समारोह में शामिल होने के लिए ट्रस्ट ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया निमंत्रण

अयोध्या, 21 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामजन्मभूमि परिसर में वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर 19 मार्च को आयोजित होने वाले नवसंवत्सर समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हो सकती हैं। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिल्ली जाकर राष्ट्रपति को इस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक एक्स हैंडल से किए गए ट्वीट में बताया गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र द्वारा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 2083 तदनुसार दिनांक 19 मार्च 2026 को श्री रामजन्मभूमि परिसर में आयोजित कार्यक्रम हेतु भारत की राष्ट्रपति को निमंत्रण दिया गया। नव संवत्सर के मौके पर राम मंदिर में कार्य कर रहे 400 श्रमिकों को राष्ट्रपति सम्मानित करेंगी। इस अवसर पर न्यास के महामंत्री श्री चंपत राय, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्देव गिरी जी, न्यासी कृष्णमोहन तथा निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र उपस्थित रहे।

बता दें कि मंदिरों का निर्माण कार्य पूरा होने पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ध्वजारोहण उत्सव मनाया था। अब ट्रस्ट मंदिर निर्माण के शिल्पियों व श्रमदान करने वाले कर्मयोगियों को सम्मानित करेगा। ट्रस्ट की तरफ से इन शिल्पियों और कर्मयोगियों की संख्या 400 तय की है। हालांकि यह संख्या बढ़ भी सकती है।

एक जानकारी के अनुसार नवसंवत्सर में चार हजार से ज्यादा अतिथियों को निमंत्रण भेजा जाएगा। इन अतिथियों में मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता शामिल होंगे।

इससे पहले 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह में हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विशाल राम मंदिर परिसर में स्थित सप्त मंदिर में भी पूजा की।

ये सात मंदिर महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह और माता शबरी को समर्पित हैं।

सप्त मंदिर भगवान राम के जीवन में महत्वपूर्ण रहे इन गुरुओं, भक्तों और सहयोगियों को दर्शाते हैं। इन्हें मंदिर परिसर में स्थान देना उनके स्थायी महत्व और सम्मान को दर्शाता है।

--आईएएनएस

एमएस/