अयोध्या दीपोत्सव: रामनगरी में लोक संस्कृति के रंगों ने बांधा समां
अयोध्या, 7 नवंबर (आईएएनएस)। रामनगरी अयोध्या में शनिवार को दसवें दीपोत्सव का भव्य आगाज हुआ। साकेत महाविद्यालय से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति और रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ढोल-मंजीरों की गूंज, धोबिया नृत्य की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरी रामनगरी को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। झांकियों के आगे महिलाएं ढोल बजाते हुए चल रही थीं, जबकि रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने फूल बरसाकर कलाकारों का स्वागत किया।
इस बार दीपोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार अपनी लोक परंपराओं के जरिए सांस्कृतिक विविधता की छटा बिखेर रहे हैं। मथुरा से 15 सदस्यीय दल मोर नृत्य की प्रस्तुति देने पहुंचा है। दल के सदस्यों ने कहा कि वे कान्हा के भक्त हैं, लेकिन प्रभु श्रीराम की धरती पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। तेलंगाना से आई 15 सदस्यीय आदिवासी कलाकारों की टीम गुसाड़ी नृत्य के जरिए दर्शकों का ध्यान खींच रही है।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने सिर पर मोर पंखों का मुकुट पहन रखा है। ढोल की थाप पर उनकी सामूहिक प्रस्तुति ने दीपोत्सव की रौनक बढ़ा दी। कलाकारों ने कहा कि भगवान राम की धरती पर प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है। मथुरा से ही नगाड़ा और बम रसिया की टीम भी दीपोत्सव में शामिल होने पहुंची है। टीम के सदस्य लक्ष्मण बेनीवाल ने बताया कि वे हर साल अयोध्या के दीपोत्सव में हिस्सा लेते हैं।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भी उनकी टीम अयोध्या आई थी। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव की भव्यता और यहां का उत्साह उन्हें हर बार आकर्षित करता है। उनकी इच्छा है कि यह आयोजन इसी तरह हर साल और भव्य रूप में होता रहे और उनकी टीम को भी इसमें प्रस्तुति देने का अवसर मिलता रहे। दीपोत्सव में शामिल एक महिला कलाकार ने बताया कि उन्होंने इसी साल से इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देना शुरू किया है। अयोध्या में अपनी कला दिखाने का अवसर मिलने से वह बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने आज की प्रस्तुति भगवान श्रीराम और अयोध्या की जनता को समर्पित की है।
उधर, दोपहर में रामकथा पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में उपराष्ट्रपति डॉ. सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम का राज्याभिषेक करेंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगी। इस दौरान विभिन्न देशों से आईं टीमें अंतरराष्ट्रीय रामलीला का मंचन करेंगी। पहली बार देश के उपराष्ट्रपति दीपोत्सव के इस भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे। दीपोत्सव का मुख्य आकर्षण शाम को सरयू तट पर आयोजित होने वाला दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम होगा। राम की पैड़ी सहित सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीये सजाए जा चुके हैं। अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवकों ने तीन दिनों तक लगातार मेहनत कर शुक्रवार को दीप सज्जा का काम पूरा किया।
शनिवार सुबह से स्वयंसेवक दीयों में तेल और बाती डालने के काम में जुटे हैं। इस पूरी व्यवस्था के लिए 900 घाट समन्वयक, 112 घाट प्रभारी और 27 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। शाम को उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक साथ लाखों दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही सरयू महाआरती में 2,147 अर्चक एक साथ हिस्सा लेंगे। वहीं, 2,100 ड्रोन के जरिए आसमान में रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया जाएगा। इससे सरयू तट पर भव्य दृश्य देखने को मिलेगा।
इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भी रंग-बिरंगी रोशनी से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दीपोत्सव को लेकर अयोध्या में देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। मंदिरों, प्रमुख मार्गों और घाटों पर उत्सव जैसा माहौल है। रोशनी, लोकनृत्य, रामलीला और दीपों की जगमगाहट के बीच रामनगरी एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रदर्शन कर रही है।
--आईएएनएस
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