अस्पताल में हिंसा बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : डॉ. राजीव कुमार सिंह
पटना, 28 मई (आईएएनएस)। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में गुरुवार की सुबह बाइक पार्किंग को लेकर हुए विवाद में सुरक्षा गार्ड ने मरीजों व उनके परिजनों के साथ मारपीट कर दी। इस घटना में दो लोगों के सिर फट गए, जबकि एक महिला के साथ धक्का-मुक्की की गई।
जानकारी के अनुसार, यह घटना इमरजेंसी वार्ड के पास पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिहटा के कंचनपुर निवासी विमल कुमार सुबह करीब 10:30 बजे बाइक इमरजेंसी वार्ड के पास पार्क कर रहे थे। गार्ड्स ने उन्हें रोका, जिस पर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर कई गार्ड्स ने मिलकर विमल कुमार पर हमला कर दिया। उनकी इतनी बुरी तरह पिटाई की गई कि उनका सिर फट गया और वह सड़क पर गिर पड़े।
घायल विमल काफी देर तक सड़क पर पड़े रहे, लेकिन गार्ड्स का आक्रामक रवैया जारी रहा। इस दौरान पटना के भट्टाचार्य इलाके के रहने वाले प्रेम कुमार अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने घायल विमल कुमार की मदद करने की कोशिश की तो गार्ड्स ने उन पर भी हमला कर दिया। प्रेम कुमार के सिर में भी गंभीर चोट आई। दोनों घायलों को अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोप लगाया कि पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में गार्ड्स अक्सर मरीजों और उनके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। कई लोगों ने कहा कि यह घटना अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “अस्पताल में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। हमने पूरी घटना की जानकारी ले ली है। निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा।”
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में तनाव व्याप्त हो गया। मरीजों के परिजनों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूछा कि पुलिसकर्मी मौजूद होने के बावजूद गार्ड्स को इस तरह मारपीट करने की कैसे छूट मिल गई।
वहीं, स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषी गार्ड्स को तुरंत निलंबित किया जाए और अस्पताल परिसर में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को इस तरह की घटनाओं का सामना न करना पड़े।
--आईएएनएस
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