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आषाढ़ पूर्णिमा पर छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची, देशभर में शांति और समृद्धि की हुई प्रार्थना

श्रीनगर, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कड़ी सुरक्षा के बीच आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के मौके पर पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की रस्मों के लिए पवित्र छड़ी (छड़ी मुबारक) को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम ले जाया गया।
 

श्रीनगर, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कड़ी सुरक्षा के बीच आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के मौके पर पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की रस्मों के लिए पवित्र छड़ी (छड़ी मुबारक) को श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से पहलगाम ले जाया गया।

पवित्र छड़ी (छड़ी मुबारक) के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा कि हमेशा की तरह पूजा-अर्चना और यात्रा जारी है। मेरी जानकारी के अनुसार, इस साल लगभग 4,25,000 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं और सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। मौसम की मुश्किल स्थितियों के बावजूद यह यात्रा का वाकई बहुत उत्साहजनक पहलू है।

उन्होंने बताया कि औसतन, हर दिन लगभग 17,000 से 18,000 तीर्थयात्री दर्शन कर रहे हैं। चूंकि आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है, इसलिए उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी अधिक संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे।

महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा, "प्रार्थना सभी की भलाई के लिए होती है। हमारी परंपरा में हम न सिर्फ ईश्वर की, बल्कि प्रकृति की भी पूजा करते हैं,सागर, नदियां, झरने, जानवर और जीवन के सभी रूपों की। हम प्रार्थना में विश्वास रखते हैं, यह हमारी सच्ची प्रार्थना है। जब हम मुख्य यात्रा के लिए आगे बढ़ेंगे, तो हम अपने केंद्र शासित प्रदेश और पूरे देश में शांति के लिए, और सभी की समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना करेंगे।"

इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का सालाना उत्सव धार्मिक उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व पूजा की रस्मों में हिस्सा लिया।

इस उत्सव में आपसी भाईचारे की भावना देखने को मिली, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर इस मौके को मनाया। इसमें शामिल लोगों ने इस आयोजन को कश्मीर की भाईचारे, मिल-जुलकर रहने और साझा सांस्कृतिक विरासत की सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक बताया।

--आईएएनएस

डीसीएच/