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आर्टिकल 370 हटने के 7 साल बाद कितना बदला जम्मू-कश्मीर? जानिए लोगों की राय

लखनऊ, 4 अगस्त (आईएएनएस)। 5 अगस्त 2019... एक ऐसा संवैधानिक फैसला जिस पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में आज भी बहस होती है। सात साल बाद भी यह दिन इतिहास में एक अहम मोड़ के तौर पर दर्ज है।
 

लखनऊ, 4 अगस्त (आईएएनएस)। 5 अगस्त 2019... एक ऐसा संवैधानिक फैसला जिस पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में आज भी बहस होती है। सात साल बाद भी यह दिन इतिहास में एक अहम मोड़ के तौर पर दर्ज है।

जम्मू-कश्मीर के इतिहास में महाराजा हरि सिंह का बहुत अहम स्थान है। 1947 में उन्होंने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए, जिसके जरिए जम्मू-कश्मीर भारत में शामिल हुआ। इसके बाद, जम्मू-कश्मीर और भारत के बीच संवैधानिक रिश्ते को खास प्रावधानों के तहत तय किया गया, जिसमें आर्टिकल 370 ने अहम भूमिका निभाई।

कई दशकों तक जम्मू-कश्मीर को आर्टिकल 370 के तहत खास संवैधानिक दर्जा मिला हुआ था, जिसमें इस क्षेत्र पर कई केंद्रीय कानूनों के लागू होने के लिए खास संवैधानिक प्रावधान थे। आर्टिकल 35ए ने राज्य के स्थायी निवासियों को खास अधिकार और सुविधाएं भी दी थीं। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने का फैसला किया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन हुआ और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बन गए।

7 साल बाद जम्मू की सड़कों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक परिवहन को देखते हुए यह सवाल बना हुआ है कि 5 अगस्त 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर कितना बदला है और आने वाले सालों में विकास किस दिशा में आगे बढ़ेगा?

आर्टिकल 370 के प्रावधानों के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आए बदलावों पर बात करते हुए विमल मेहरा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में जो बदलाव दिखे हैं, उनका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जाना चाहिए। वे कहते हैं कि आज पर्यटक श्रीनगर के लाल चौक जा रहे हैं, तिरंगा फहरा रहे हैं और अपने परिवार व दोस्तों के साथ तस्वीरें खींच रहे हैं और रील्स बना रहे हैं।

उनके मुताबिक, यह वही लाल चौक है जहां कभी लोगों को पाकिस्तानी झंडा लहराते हुए देखा जाता था, लेकिन आज बड़े ही शान से भारत का तिरंगा फहरा रहा है। घर-घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण की पवित्र झांकियां निकाली जा रही हैं। बहुत सारें मंदिरों को खोला गया। आज हर तरफ रौनक है।

दीपक सिंह ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि पहले अलगाववादी सोच की वजह से जम्मू-कश्मीर के आम लोगों को शटडाउन, हड़ताल और कर्फ्यू का सामना करना पड़ता था। उनका आरोप है कि जहां अलगाववादी नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते थे, वहीं घाटी के युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेला जाता था। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद, "इस तरह की सोच का धंधा" खत्म हो गया है। अब यहां तिरंगा फहराया जाता है। पत्थरबाजी जैसी घटनाएं 90 से 95 प्रतिशत कम हो गई हैं।

जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़े बदलाव आए हैं। आज घाटी तक ट्रेनें पहुंच रही हैं, पर्यटन बढ़ रहा है और विकास के काम हो रहे हैं। उनका कहना है कि आतंकवादी घटनाओं में भी कमी आई है, हालांकि हालिया आतंकी हमले चिंता का विषय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद की ऐसी घटनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

जम्मू-कश्मीर के श्री सनातन धर्म सभा अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि ने कहा कि अनुच्छेद 370 की वजह से गोरखा समुदाय, वाल्मीकि समुदाय और पीओजेके से विस्थापित लोग लंबे समय तक राजनीतिक और रोजगार के अधिकारों से वंचित रहे। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद उनके जीवन में बदलाव आया है। अब वे चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं और राजनीतिक पार्टियां भी वोट मांगने के लिए उनसे संपर्क करती हैं।

पुरुषोत्तम दधीचि का कहना है कि सबसे बड़ा बदलाव पूरे जम्मू-कश्मीर में दिख रही शांति की भावना है। वे कहते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटक और वैष्णो देवी जैसे धार्मिक स्थलों पर जाने वाले तीर्थयात्री अब पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय जवानों के प्रति दुर्व्यवहार किया जाता था, उन्हें अपना काम नहीं करने दिया जाता था और उनका मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन आज इन सब चीजों में भी बदलाव आया है और लोगों में जवानों के प्रति सम्मान बढ़ा है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी