'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए नरेंद्र बेरवाल का चयन, हांसी में जश्न का माहौल
हांसी, 18 अगस्त (आईएएनएस)। हांसी जिले के सोरखी गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल को 'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए चुना गया है, जिससे बाद पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। परिजनों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस उपलब्धि पर गर्व जताया।
'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए चयनित होने पर नरेंद्र बेरवाल इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि वह आगे भी इसी तरह देश और प्रदेश के लिए पदक जीतकर नाम रोशन करने का प्रयास करेंगे, क्योंकि देश के लिए खेलना गर्व की बात है। इस तरह का सम्मान खुशी को और बढ़ाता है। वह हमेशा तिरंगे की शान को ऊंचा रखने के लिए मेहनत करते रहेंगे।
नरेंद्र मानते हैं कि मेहनत, अनुशासन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और कोच की सलाह का ईमानदारी से पालन करने वाला खिलाड़ी निश्चित रूप से सफलता हासिल कर सकता है।
नरेंद्र के 'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए चयन पर उनके पिता जगदीश बेरवाल और माता रोशनी देवी ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पूरे सोरखी गांव और हांसी जिले के लिए यह गर्व की बात है। परिवार को उम्मीद है कि नरेंद्र आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान और ऊंचा करेंगे।
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले नरेंद्र बेरवाल ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया, जिसके बाद नरेंद्र का नाम 'अर्जुन अवॉर्ड' के लिए चयन हुआ है।
खास बात यह है कि नरेंद्र बेरवाल ने जिस भी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, वहां देश के लिए पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एशियन गेम्स में कांस्य पदक, यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, यूथ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2025 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक उनके शानदार सफर की गवाही देते हैं।
नरेंद्र बेरवाल ने वर्ष 2009 में दूध, दही और हलवे जैसे पौष्टिक आहार के साथ बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। मैट्रिक के बाद उन्होंने पूरी तरह मुक्केबाजी पर ध्यान केंद्रित कर लिया। भिवानी बॉक्सिंग एकेडमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
नरेंद्र साल 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप 2012 में रजत, आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप 2013 में रजत और मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स 2015 में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। इसके बाद एशियन गेम्स 2023 में कांस्य पदक और करीब छह महीने बाद यूरोपियन कप में स्वर्ण पदक जीतकर नरेंद्र ने अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नरेंद्र ने 90 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल जीतकर उन्होंने पदक पक्का किया और इसके बाद सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के डेमर थॉमस से 0-5 से हार के बावजूद नरेंद्र ने रजत पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया।
रजत पदक जीतने के बाद नरेंद्र ने कहा था कि उनका सफर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय 16 वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को दिया।
--आईएएनएस
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