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अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने साझा किए अपने अनुभव, कहा-सैटेलाइट से कहीं आगे है 'गगनयान'

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मानव अंतरिक्ष मिशनों की जटिलताओं, भारत के स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने चौथे इंडियन डेफस्पेस सिम्पोजियम 2026 के बारे में बताया।
 
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने साझा किए अपने अनुभव, कहा-सैटेलाइट से कहीं आगे है 'गगनयान'

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मानव अंतरिक्ष मिशनों की जटिलताओं, भारत के स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने चौथे इंडियन डेफस्पेस सिम्पोजियम 2026 के बारे में बताया।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "एक सैटेलाइट मिशन और मानव अंतरिक्ष मिशन के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार, जहां सैटेलाइट मिशन अपेक्षाकृत कम जटिल होते हैं, वहीं किसी इंसान को अंतरिक्ष में भेजना अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जटिल प्रक्रिया है।"

उन्होंने कहा कि इसमें न केवल तकनीकी बल्कि सुरक्षा और मानवीय पहलुओं का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए लंबे समय तक तैयारी करनी होती है और कई स्तरों पर परीक्षण किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन से पहले किसी प्रकार का टेस्ट मिशन लॉन्च नहीं किया गया था जबकि गगनयान से पहले कई परीक्षण मिशन किए जा रहे हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि मानव अंतरिक्ष मिशन कितने अधिक जटिल और संवेदनशील होते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मिशनों के लिए योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सोच और कार्यप्रणाली दोनों में बदलाव जरूरी होता है। किसी भी मिशन की शुरुआत एक विचार से होती है, लेकिन जैसे-जैसे वह विकसित होता है, उसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। इस प्रक्रिया में समय देना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को मजबूत स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है। उन्होंने हाल ही में लॉन्च किए गए एसबीएस-3 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, आने वाले समय में भारत का अपना स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर और अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर होगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत मिसाइल और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और भविष्य में यह और बेहतर होगा। भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम