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अंकिता भंडारी के माता-पिता न्याय की गुहार लेकर इंडिया गेट पर बैठे, राहुल गांधी ने की मुलाकात

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
 

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘वीआईपी’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिला। जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है, उस महिला-विरोधी भाजपा से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, इंडिया गेट पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।"

दूसरी ओर, पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों और प्रदर्शन के बीच अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने "पहले दिन से ही पूरी गंभीरता के साथ काम किया" ताकि अपराधियों को सजा मिल सके।

उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मामले में आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया और निष्पक्ष व गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।

बयान के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें महत्वपूर्ण सबूत और करीब 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए। अभियोजन पक्ष द्वारा मजबूत पैरवी के चलते आरोपियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हुईं और वे पूरे ट्रायल के दौरान जेल में रहे। अंततः अंकिता के हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

सरकार ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार ने अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिवार की मांग के अनुसार तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया। इसके अलावा, जब उनके माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग की तो मुख्यमंत्री धामी ने वही आदेश दिया।

गौरतलब है कि 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।

--आईएएनएस

डीएससी