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आंध्र प्रदेश : भ्रष्टाचार के खिलाफ पूर्व डिप्टी चीफ इंजीनियर पर पीएमएलए के तहत ईडी की कार्रवाई, 1.39 करोड़ की संपत्ति अटैच

विशाखापत्तनम, 5 फरवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशाखापत्तनम सब-जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत एक बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने अल्लडाबोइना सतीश के मामले में 1.39 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।
 
आंध्र प्रदेश : भ्रष्टाचार के खिलाफ पूर्व डिप्टी चीफ इंजीनियर पर पीएमएलए के तहत ईडी की कार्रवाई, 1.39 करोड़ की संपत्ति अटैच

विशाखापत्तनम, 5 फरवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशाखापत्तनम सब-जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत एक बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने अल्लडाबोइना सतीश के मामले में 1.39 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।

ये संपत्तियां अल्लडाबोइना सतीश (आईआरएसई: 2001 बैच), तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीनियर (डिजाइन), नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे, मालीगांव, गुवाहाटी के नाम पर और उनके परिवार के सदस्यों (पत्नी और ससुराल वालों) के नाम पर हैं। जांच में पाया गया कि ये संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से काफी अधिक हैं।

अटैच की गई संपत्तियों में नौ आवासीय फ्लैट और प्लॉट शामिल हैं, साथ ही अल्लडाबोइना सतीश, उनकी पत्नी और ससुर के नाम पर तीन फिक्स्ड डिपॉजिट भी हैं। यह कार्रवाई सीबीआई, एसीबी, विशाखापत्तनम द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(2) पढ़कर 13(1)(ई) के तहत आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, 1 अप्रैल 2008 से 24 जनवरी 2016 की जांच अवधि में सतीश ने लगभग 1.39 करोड़ रुपए की संपत्तियां अर्जित कीं, जो उनकी ज्ञात आय से 83.30 प्रतिशत अधिक थीं।

ईडी की जांच से सामने आया कि सतीश ने धोखाधड़ी और बेईमानी से अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक अचल संपत्तियां जमा कीं। अपराध की कमाई (पीओसी) का सीधा इस्तेमाल उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। फंड के अवैध स्रोत को छिपाने के लिए उनके, पत्नी और ससुर के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया। इन नकद राशियों का उपयोग बैंक ट्रांसफर के माध्यम से संपत्तियां खरीदने में हुआ, जबकि कुछ मामलों में नकद सीधे परिचित व्यक्तियों को दिया गया।

सतीश अपने नाम या परिवार/रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियों के अधिग्रहण के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके और न ही इसका वैध स्रोत साबित करने वाले दस्तावेज पेश कर सके। ईडी ने पुष्टि की कि ये संपत्तियां अवैध कमाई से हासिल की गई हैं और पीएमएलए के तहत अटैचमेंट आवश्यक था ताकि आरोपी इन्हें छिपा या स्थानांतरित न कर सके।

यह मामला रेलवे विभाग में भ्रष्टाचार और असंगत संपत्ति के खिलाफ ईडी की सतत कार्रवाई का हिस्सा है। सीबीआई ने 2016 में ही असंगत संपत्ति का केस दर्ज किया था, जिसके बाद पीएमएलए जांच शुरू हुई। ईडी का उद्देश्य अपराध की कमाई को जब्त कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों पर सख्ती बरतना है। आगे की जांच जारी है और अधिक संपत्तियां अटैच होने या अन्य कार्रवाई की संभावना है।

--आईएएनएस

एससीएच