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अमिताभ बच्चन की आवाज बनकर छाए सुदेश भोसले, गायकी और मिमिक्री से बनाई अलग पहचान

मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। अमिताभ बच्चन सहित कई प्रसिद्ध अभिनेताओं की आवाज की हूबहू नकल करने वाले हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक, मिमिक्री कलाकार और डबिंग आर्टिस्ट सुदेश भोसले ने अपने दम पर फिल्म जगत में एक अलग पहचान बनाई है। 1 जुलाई 1960 को मुंबई में जन्मे सुदेश भोसले उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी गायकी, आवाज की विविधता और मिमिक्री कला से लोगों का दिल जीता। भोसले विशेष रूप से अमिताभ बच्चन की आवाज में गाए गए गीतों के कारण प्रसिद्ध हुए।
 

मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। अमिताभ बच्चन सहित कई प्रसिद्ध अभिनेताओं की आवाज की हूबहू नकल करने वाले हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक, मिमिक्री कलाकार और डबिंग आर्टिस्ट सुदेश भोसले ने अपने दम पर फिल्म जगत में एक अलग पहचान बनाई है। 1 जुलाई 1960 को मुंबई में जन्मे सुदेश भोसले उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी गायकी, आवाज की विविधता और मिमिक्री कला से लोगों का दिल जीता। भोसले विशेष रूप से अमिताभ बच्चन की आवाज में गाए गए गीतों के कारण प्रसिद्ध हुए।

सुदेश के माता-पिता का नाम सुमंताई भोसले और एनआर भोसले है। सुमंताई भोसले भी एक मशहूर गायिका हैं, जिन्हें सुदेश को संगीत की शुरुआती तालीम देने का श्रेय जाता है। कॉलेज के दिनों से ही सुदेश भोसले को गायन और मिमिक्री का शौक था। उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने के बाद उन्हें वर्ष 1988 में फिल्म 'जलजला' से पार्श्वगायन का पहला बड़ा अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया।

सुदेश भोसले अमिताभ बच्चन की आवाज की हूबहू नकल कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन के लिए गीत गाए। उनके लोकप्रिय गीतों में 'जुम्मा चुम्मा दे दे', 'शावा शावा', 'मेरी मखना', 'बड़े मियां तो बड़े मियां' और 'सोना सोना' जैसे गीत शामिल हैं।

गायन के साथ-साथ भोसले ने डबिंग कलाकार के रूप में भी काम करते हैं। अभिनेता संजीव कुमार के निधन के बाद अधूरी रह गई फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' में उनकी आवाज दी। इसके अलावा उन्होंने कई कलाकारों के लिए डबिंग कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

सुदेश भोसले छोटे पर्दे पर भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न संगीत और मनोरंजन कार्यक्रमों में निर्णायक, प्रस्तोता और कलाकार के रूप में नजर आए। उनकी हास्य शैली, मिमिक्री और मंच संचालन ने उन्हें टीवी दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय बनाया।

भारतीय संगीत जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए भोसले को वर्ष 2008 में मदर टेरेसा मिलेनियम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 150 से अधिक फिल्मों में अपनी आवाज दी। आज भी सुदेश भोसले अपनी गायकी, मिमिक्री और लाइव प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। सुदेश भोसले ने भक्ति संगीत और मंचीय प्रस्तुतियों में भी योगदान दिया है। 2010 में उन्होंने महात्मा रामचन्द्र वीर और आचार्य धर्मेंद्र द्वारा रचित वज्रांग वंदना महास्त्रोत तथा वज्रांग विनय स्त्रोत के भजनों को अपनी आवाज दी।

सुदेश भोसले ने हाल ही में दिग्गज गायिका आशा भोसले को याद करते हुए बेहद भावुक शब्दों में अपनी जिंदगी और करियर पर उनके प्रभाव को साझा किया। सुदेश भोसले ने बताया कि शुरुआती दिनों में जब वे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब आशा भोसले ने उन्हें न सिर्फ मौका दिया बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

--आईएएनएस

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