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अमेरिका का संदेश साफ, जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रहा : सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया। उनका ये बयान सुर्खियों में है। इस टिप्पणी को राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने काफी अहम बताया। उनके मुताबिक दुनिया के लिए संदेश स्पष्ट है कि अब जम्मू कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया।
 

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया। उनका ये बयान सुर्खियों में है। इस टिप्पणी को राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने काफी अहम बताया। उनके मुताबिक दुनिया के लिए संदेश स्पष्ट है कि अब जम्मू कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया।

आईएएनएस से बातचीत में शृंगला ने कश्मीर में दिए गोर के इस बयान को दो वजहों से अहम माना। उन्होंने कहा, "पहला कारण यह है कि अतीत में अमेरिका की ओर से इस तरह का कोई बयान नहीं आया है। अमेरिका के बयान अधिक संतुलित और सावधानीपूर्वक होते रहे हैं। उन पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव रहा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा और निश्चित रूप से भारत तथा पाकिस्तान के बीच इस मामले को लेकर अमेरिका का अपना नजरिया भी शामिल है। इसलिए पहली महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने इतनी स्पष्ट और निर्णायक टिप्पणी की। यह अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात यह है कि सर्जियो गोर अमेरिका के कोई सामान्य प्रतिनिधि नहीं हैं। वह अमेरिका के राष्ट्रपति के बेहद करीबी सहयोगी हैं। वह केवल भारत में अमेरिका के राजदूत ही नहीं हैं, बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए भी जिम्मेदार हैं। यानी उनके अधिकार क्षेत्र में पूरा क्षेत्र आता है, इसलिए उनकी बात को केवल भारत में अमेरिका के राजदूत के बयान के रूप में नहीं देखा जा सकता।"

राज्यसभा सांसद ने माना कि इसी दृष्टिकोण (पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी का निर्वहन करने वाले शख्स) से देखें तो अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर का दौरा करना, श्रीनगर जाना, मुख्यमंत्री से मुलाकात करना और उसके बाद यह बयान देना कि जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है-बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

श्रृंगला ने हाल के वर्षों में इस मुद्दे को लेकर भारत के अप्रोच की प्रशंसा करते हुए कहा, "मेरा मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में इस मुद्दे पर काफी प्रगति हुई है। इससे पहले भी अमेरिका के राजदूतों की भारत यात्राएं महत्वपूर्ण रही हैं। अमेरिकी राजदूत ब्लैकवेल भारत आए थे। इसके बाद अमेरिकी राजदूत केन जस्टर भी भारत आए थे। उस समय मैं अमेरिका में था। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद मेरे समकक्ष भी भारत आए थे। यह राजदूतों के एक प्रतिनिधिमंडल की पहली यात्रा थी और केन जस्टर भी उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।"

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत को मिले अमेरिकी समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा," कुछ मायनों में यह (अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का दौरा) भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के प्रति अमेरिका के समर्थन का बहुत मजबूत प्रदर्शन था। उस समय अमेरिकी कांग्रेस और अन्य जगहों पर इस मुद्दे को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। केन जस्टर की भागीदारी के साथ अमेरिकी प्रशासन ने इस मामले पर अपना रुख भी स्पष्ट किया था।"

सांसद के मुताबिक, आज जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं रह गई है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर हमारी राजनीतिक और आर्थिक मुख्यधारा में आ गया है। जम्मू-कश्मीर के लोग देश के बाकी हिस्सों के साथ पूरी तरह एकीकृत हो चुके हैं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में हो रहे आर्थिक विकास और प्रगति को भी देख रहे हैं। बड़ी मात्रा में विकास का सीधा लाभ उन्हें मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन में जबरदस्त वृद्धि हुई है और मेरा मानना है कि इसमें जी20 की बैठक का भी बड़ा योगदान रहा।

श्रीनगर में तीसरी जी20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक 22 से 24 मई 2023 तक आयोजित की गई थी। इस पर शृंगला ने कहा, " जी-20 की बैठक श्रीनगर में आयोजित करने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया था। उस समय मैं जी20 का मुख्य समन्वयक था। मेरे विचार से श्रीनगर में जी20 की बैठक आयोजित करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ।"

पीओके का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "वे (अमेरिका) सीमा के दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके को भी देखते हैं। वहां वे आजादी और अधिकारों की कमी, आर्थिक विकास की लचर गति तथा वहां के लोगों की कठिनाइयों और परेशानियों को देखते हैं। मुझे नहीं लगता कि वे अपना भविष्य वैसा देखना चाहते हैं। आखिरकार, पीओके में ऐसे लोग भी हैं जो कहते हैं कि वे भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं। तो फिर कोई वहां जाकर उस व्यवस्था का हिस्सा क्यों बनना चाहेगा? वे तो सीमा के सही तरफ हैं।"

श्रृंगला ने कहा, "मेरा मानना है कि यह भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। मैं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को अच्छी तरह जानता हूं। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो बिना सोचे-समझे बयान दे दें। वह स्पष्ट रूप से अपनी बात को बहुत सोच-समझकर और रणनीतिक तरीके से रखते हैं। जैसा कि मैंने कहा, वह अमेरिकी प्रशासन में बेहद महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। वह चीजों को पहले के कई राजनयिकों की तुलना में अधिक राजनीतिक दृष्टिकोण से देखते हैं। पहले के कई राजनयिक करियर डिप्लोमैट रहे हैं और उनका नजरिया कुछ हद तक सीमित रहा है।"

राज्यसभा सांसद ने उन शब्दों में छुपे अमेरिकी संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा, "मैं निश्चित रूप से सर्जियो गोर को इस बात का श्रेय दूंगा कि उन्होंने ऐसा दृष्टिकोण सामने रखा है, जो न केवल सही है, बल्कि अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत संदेश देता है। यह संदेश यह है कि जम्मू-कश्मीर अब कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। दूसरे देशों को अब यह स्वीकार करना चाहिए कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।"

--आईएएनएस

केआर/