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अल्पना बुच ने बताया कैसे निभाती हैं बा का मुश्किल किरदार, बोलीं-'स्क्रिप्ट चलती ट्रेन की तरह'

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री अल्पना बुच टीवी सीरियल 'अनुपमा' में लीला के किरदार में आ रही हैं। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि वे बा (लीला) का किरदार निभाते वक्त वे सिर्फ डायलॉग्स को ही नहीं देखती हैं बल्कि उसके पीछे सख्त व्यवहार के पीछे की कमजोरी को भी समझने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके किरदार में और गहराई आए।
 

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री अल्पना बुच टीवी सीरियल 'अनुपमा' में लीला के किरदार में आ रही हैं। अभिनेत्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि वे बा (लीला) का किरदार निभाते वक्त वे सिर्फ डायलॉग्स को ही नहीं देखती हैं बल्कि उसके पीछे सख्त व्यवहार के पीछे की कमजोरी को भी समझने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके किरदार में और गहराई आए।

उन्होंने कहा, "धारावाहिकों में स्क्रिप्ट एक चलती ट्रेन की तरह होती है। आप उसे इसलिए नहीं रोक सकते क्योंकि आप सीन को दूसरे तरीके से लिखना चाहते हैं। अगर किसी लाइन से बा (लीला) बिना वजह गुस्सा या नरम होती हैं, तो मैं अपनी तरफ से इसमें बदलाव लाने के लिए भी कहती हूं। हिंदी में एक गुजराती अंदाज ही मतलब बदलने के लिए काफी होता है।"

अल्पना का मानना है कि बा (लीला) का गुस्सा अक्सर कमजोरी से आता है। उन्होंने कहा, "मुझे याद है, कई बार बा (लीला) को सिर्फ डांटते हुए दिखाया गया था लेकिन मुझे लगता है कि वह घर के बदलने, पीछे छूट जाने से डरी हुई है। मैंने गुस्से के नीचे छिप डर को डायलॉग को बदले बिना दिखाया है। लाइन वही रही लेकिन सीन बदल गया।"

अभिनेत्री ने बताया कि डेली सोप में तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिलता है। उन्होंने कहा, "पहले मैं सीन को एक बार तथ्यों के लिए पढ़ती हूं। जैसे कि कमरे में कौन है, बा (लीला) क्या चाहती है, वो क्या नहीं कह रही हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर दर्शक बा (लीला) को सिर्फ एक विलेन के तौर पर देखते हैं, तो मैं अपने किरदार के साथ न्याय नहीं कर पा रही हूं। वो गलत हो सकती हैं लेकिन खोखली नहीं होनी चाहिए।"

अल्पना ने बताया कि उनकी खुद की पर्सनालिटी और बा के किरदार में काफी फर्क है। उन्होंने कहा, "मुझसे और बा (लीला) में जमीन-आसमान का फर्क है। अगर मुझे किसी बात पर जल्दी हां कहने, माफ कर देने या हंसी में टाल देने का मन करता है, तो वो मैं हूं। बा (लीला) इतनी आसानी से किसी बात को जाने नहीं देती। किरदार तभी काम करता है जब गुस्से के नीचे कोई इमोशन हो, दर्शकों को वो इमोशंस दिखे लेकिन महसूस भी हो।"

--आईएएनएस

एनएस/पीएम