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अलीगंज अग्निकांड: 15 लोगों की जान लेने वाली इमारत पर चला बुलडोजर, एलडीए ने शुरू कराया ध्वस्तीकरण

लखनऊ, 25 जुलाई (आईएएनएस)। यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में पिछले महीने भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत का कारण बनी चार मंजिला इमारत का शनिवार को ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भारी पुलिस बल और मशीनरी की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की।
 

लखनऊ, 25 जुलाई (आईएएनएस)। यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में पिछले महीने भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत का कारण बनी चार मंजिला इमारत का शनिवार को ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भारी पुलिस बल और मशीनरी की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की।

इस दौरान भवन स्वामी की ओर से कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध किया गया। एलडीए की टीम शनिवार को बुलडोजर और हाइड्रोलिक मशीन और अधिकारियों-कर्मचारियों के दल के साथ मौके पर पहुंची। ध्वस्तीकरण अभियान शुरू करने से पहले पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई और आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाकर यातायात रोक दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, संबंधित भवन को अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामलों में ध्वस्त किए जाने का आदेश दिया गया था। प्राधिकरण का कहना है कि भवन स्वामी को निर्माण हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर एलडीए ने स्वयं ध्वस्तीकरण शुरू कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्राधिकरण को पूरी कार्रवाई करनी पड़ी तो इसका खर्च भी भवन स्वामी से वसूला जाएगा।

ध्वस्तीकरण के दौरान भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि भवन स्वामी को 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, ऐसे में उसी दिन सुबह ध्वस्तीकरण शुरू करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें ध्वस्तीकरण का अलग आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। इस बीच, आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध न होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। भवन स्वामी पक्ष का आरोप है कि संबंधित कार्यालय बंद होने के कारण आदेश की प्रति नहीं मिल सकी, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई। शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं ने विरोध भी दर्ज कराया था।

उल्लेखनीय है कि 22 जून को अलीगंज स्थित इस भवन में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के समय दूसरी मंजिल पर संचालित लाइब्रेरी और प्रशिक्षण केंद्र में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। कई लोगों ने पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई, जबकि एक युवक ऊंचाई से कूदने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था।

घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। पुलिस ने भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही के आरोप में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में भवन में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं और निर्माण संबंधी कई अनियमितताओं की बात भी सामने आई थी।

--आईएएनएस

विकेटी/एएस