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अलेक्जेंड्रिया में आईएनएस सुदर्शिनी, 10 महीने में दूसरी बार मिस्र की यात्रा

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी मिस्र के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर अलेक्जेंड्रिया पहुंच गया है। आईएनएस सुदर्शिनी यात्रा लोकायन पर है और अलेक्जेंड्रिया में पोत का यह दौरान दूसरा दौरा है।
 

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी मिस्र के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर अलेक्जेंड्रिया पहुंच गया है। आईएनएस सुदर्शिनी यात्रा लोकायन पर है और अलेक्जेंड्रिया में पोत का यह दौरान दूसरा दौरा है।

दरअसल लोकायन 26, एक 10 महीने लंबा अंतरमहाद्वीपीय समुद्री अभियान है। लोकायन 26 के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी अब तक अरब सागर, लाल सागर और भूमध्य सागर से गुजर चुका है। पोत ने स्वेज नहर का पारगमन भी किया। इसके अलावा उसने फ्रांस में आयोजित प्रसिद्ध एस्केल आ सेट समुद्री महोत्सव में भी हिस्सा लिया है।

इस अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से अपनी यात्रा शुरू की थी। 10 महीने के अभियान में पोत को करीब 22 हजार समुद्री मील की दूरी तय कर करेंगा। इस दौरान 13 देशों अलग-अलग देशों के कुल 18 बंदरगाहों पर इस पारंपरिक समुद्री जहाज को पड़ाव डालना है।

यात्रा के दौरान नौसेना के प्रशिक्षुओं को लंबे समुद्री अभियानों, खुले समुद्र में पोत संचालन, पाल संभालने और पारंपरिक समुद्री कौशल का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।

अलेक्जेंड्रिया पहुंचने पर आईएनएस सुदर्शिनी का स्वागत अलेक्जेंड्रिया नौसैनिक अड्डे के कमांडर रियर एडमिरल मोहम्मद अब्देल अजीज और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने किया।

यहां भारतीय और मिस्र की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें औपचारिक मुलाकातें, दोनों पोतों के बीच दौरे और पेशेवर बातचीत शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और आपसी संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस अभियान में आईएनएस सुदर्शिनी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी हासिल की।

पोत ने अपना पहला अटलांटिक महासागर पार अभियान पूरा किया। 27 मई 2026 को केप वर्डे से 19 दिन की समुद्री यात्रा के बाद यह एंटीगुआ पहुंचा। इसी दौरान पोत ने कोच्चि से रवाना होने के बाद 10 हजार समुद्री मील की दूरी पूरी की। इसके बाद आईएनएस सुदर्शिनी अजोरेस और पुर्तगाल पहुंचा।

22 अगस्त को लिस्बन पहुंचने के साथ उसने केवल सात महीनों में 15वां बंदरगाह दौरा पूरा किया था। तीन मस्तूल वाला यह पाल पोत केवल नौसैनिक प्रशिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा का प्रतिनिधि भी है।

लोकायन 26 के जरिए भारतीय नौसेना पेशेवर प्रशिक्षण के साथ-साथ विभिन्न देशों के साथ समुद्री संपर्क और दोस्ती को मजबूत कर रही है। लंबी समुद्री यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और महासागर के संदेश को भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा रहा है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी