एआई फॉर एजुकेशन-एआई इन एजुकेशन, कक्षा 3 से 8 के छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सीबीएसई का नया पाठ्यक्रम लॉन्च किया है।
‘एआई फॉर एजुकेशन, एआई इन एजुकेशन’ पर आधारित यह पहल 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू की जाएगी। इसे स्कूल शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में यह शुरुआत की गई। इस अवसर पर शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी, शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी व सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में इस नए पाठ्यक्रम का लॉन्च भविष्य उन्मुख शिक्षा की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से पहली बार बड़े स्तर पर स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक संरचित तरीके से शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम सुव्यवस्थित मॉड्यूल, शिक्षकों के लिए विस्तृत हैंडबुक और छात्रों के मूल्यांकन के लिए मजबूत ढांचा प्रदान करता है। इससे बच्चों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, “एआई फॉर एजुकेशन, एआई इन एजुकेशन” के विजन के अनुरूप यह पहल शिक्षा में नई ऊर्जा लाएगी। बच्चों में तार्किक सोच, नए दृष्टिकोण और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देगी। भारत की तकनीक आधारित प्रगति को देखते हुए यह पाठ्यक्रम छात्रों को डिजिटल भविष्य को समझने और उसमें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाएगा।” उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की सराहना करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने इस दूरदर्शी ढांचे को विकसित कर शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और तकनीक-समर्थ बनाया है।
वहीं, जयंत चौधरी ने कहा कि आज की शिक्षा को केवल वर्तमान जरूरतों के अनुसार नहीं, बल्कि ऐसे भविष्य के लिए तैयार करना होगा जो लगातार बदल रहा है और जिसकी दिशा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ज्ञान के निर्माण, निर्णय लेने और अर्थव्यवस्था के काम करने के तरीके को बदल रही है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे केवल तकनीक के उपभोक्ता न बनें, बल्कि उसके जिम्मेदार निर्माता और नेतृत्वकर्ता बनें। यह पाठ्यक्रम शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को एआई सीखने के लिए तैयार करना है। इसमें कम्प्यूटेशनल थिंकिंग कौशल के माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, समस्या समाधान, पैटर्न पहचान जैसी क्षमताओं का विकास किया जाएगा।
साथ ही उन्हें यह भी समझाया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दैनिक जीवन में क्या महत्व और उपयोग है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से डिजिटल साक्षरता, तकनीक का जिम्मेदार उपयोग, नवाचार, आलोचनात्मक सोच और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआई को शिक्षा में शामिल करना छात्रों को भविष्य के डिजिटल नागरिक के रूप में तैयार करने के लिए बेहद जरूरी माना गया है। कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को एआई की नींव के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यही वह बौद्धिक ढांचा है जो एआई आधारित समाधान को समझने और विकसित करने में मदद करता है।
इसके माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, व्यवस्थित तरीके से समस्या सुलझाने की क्षमता और पैटर्न पहचान जैसे कौशल विकसित होते हैं। शुरुआती स्तर पर इस तरह की शिक्षा से छात्र डेटा का सही उपयोग करना सीखते हैं और तकनीक का नैतिक तरीके से उपयोग करने के लिए तैयार होते हैं। यह पाठ्यक्रम समग्र विकास को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि यह गणित, विज्ञान और मानविकी जैसे विभिन्न विषयों के बीच संबंध स्थापित करता है। यह छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि ज्ञान अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ नहीं है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसमें भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व दिलाने का उद्देश्य रखा गया है। साथ ही यह राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2023 के अनुसार तैयार किया गया है, जिसमें सीखने के लक्ष्य, क्षमताएं और परिणाम स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत चरणबद्ध तरीके से पहले कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की मजबूत नींव रखी जाएगी और बाद में उच्च कक्षाओं में एआई की पढ़ाई को विस्तार दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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