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अहमदाबाद में गुजराती, हैदराबाद में तेलुगु तो मुंबई में मराठी महापौर क्यों नहीं : देवेंद्र फडणवीस (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

मुंबई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में नगर निकाय और बीएमसी चुनाव के मतदान से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आईएएनएस से बुधवार को एक्सक्लूसिव बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं और मुंबई में मराठी मेयर बनाने की बात करना गलत क्यों है? इसके साथ ही उन्होंने उद्धव-राज ठाकरे के गठबंधन, हिजाब, खान-पठान और बांग्लादेशियों के मुद्दे से जुड़े सवालों का जवाब दिया है।
 
अहमदाबाद में गुजराती, हैदराबाद में तेलुगु तो मुंबई में मराठी महापौर क्यों नहीं : देवेंद्र फडणवीस (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

मुंबई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में नगर निकाय और बीएमसी चुनाव के मतदान से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आईएएनएस से बुधवार को एक्सक्लूसिव बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं और मुंबई में मराठी मेयर बनाने की बात करना गलत क्यों है? इसके साथ ही उन्होंने उद्धव-राज ठाकरे के गठबंधन, हिजाब, खान-पठान और बांग्लादेशियों के मुद्दे से जुड़े सवालों का जवाब दिया है।

सवाल :- कॉर्पोरेशन के चुनाव में आपने खूब प्रचार किया, नतीजा क्या आने वाला है और आपको क्या उम्मीद है?

जवाब :- हमने अपने उम्मीदवारों का चुनाव सही तरीके से किया है। इसमें सब्जी बेचने वाले से लेकर डॉक्टर, प्राचार्य, इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों को चुनाव में उतारा है। हमने कैंपेनिंग भी ठीक तरीके से की है। लोगों से सीधी मुलाकात की और रोड शो किया। 80-85 प्रतिशत बात हमने सिर्फ विकास पर की। राज्य और नेशनल की जगह हमने स्थानीय मुद्दों पर बात की है और अपने एक्शन प्लान पर बात की है। हमारा मकसद लोगों को अपने से कनेक्ट करना था, उसमें हम कामयाब हुए हैं। इसका परिणाम ये है कि मुंबई सहित तमाम कार्पोरेशन में अच्छा नतीजा आता दिखाई दे रहा है। 29 में से 26 या 27 कार्पोरेशन में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी का ही महापौर होगा।

सवाल :- आपने विकास पर बातें की, लेकिन इसके बावजूद हिजाब और खान-पठान का मुद्दा उठ गया। इसके लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?

जवाब :- हम लोगों ने सिर्फ जवाब दिया है। हम चुनाव को भावनात्मक मुद्दे पर नहीं ले जाना चाहते थे। हमारे लिए चुनाव को सिर्फ विकास के मुद्दे पर रखना जरूरी था क्योंकि विकास का मुद्दा सिर्फ हमारे पास था। हमारे विरोधियों के पास 25 साल तक मुंबई चलाने के बाद भी विकास का एक काम भी दिखाने के लिए नहीं था। हमारे पास कोस्टल रोड, सी लिंक, नवी मुंबई एयरपोर्ट, अटल सेतु, 475 किमी का मेट्रो, सब-अर्बन रेलवे, एसटीपी, रोड नेटवर्क, टनल जैसे काम हैं। इन्हें हमने पूरा किया है, 25 साल में उनके पास एक भी काम गिनाने के लिए नहीं था इसलिए विरोधी हमें इस मुद्दे से भटकाना चाहते थे। हमने तो इनाम घोषित किया था कि उद्धव ठाकरे का एक काम गिनाइए और एक हजार रुपए लेकर जाइए। हर सभा में मैं राशि बढ़ाता गया और सात हजार तक ले गया लेकिन कोई नहीं बोला। उन्होंने कहा कि मराठी और मुस्लिम बनकर मुंबई का मेयर बनाएंगे, हमने कहा कि मराठी भी हिन्दू हैं। मराठी और हिन्दू को अलग नहीं कर सकते। आपका ये दांव हम नहीं चलेंगे देंगे। मराठी महापौर बनेगा लेकिन हिन्दू को अलग नहीं कर सकते। अगर चेन्नई में तमिल महापौर, अहमदाबाद में गुजराती, हैदराबाद में तेलुगू, पंजाब में पंजाबी, राजस्थान में राजस्थानी महापौर बनता है तो महाराष्ट्र के मुंबई में मराठी महापौर बनाने की बात करना कहां गलत है?

सवाल :- क्या उद्धव ठाकरे की राजनीति खत्म हो रही थी, राज ठाकरे ने सहारा देने की कोशिश की और इसका सबसे अधिक नुकसान राज ठाकरे को ही होने वाला है। आपका क्या अनुमान है?

जवाब :- दोनों भाइयों के लिए पार्टियों की जमीन बचाना मुश्किल हो गया है। ये दोनों पार्टियां जमीन खो रही हैं। जमीन को तलाशने के लिए उन्हें लगा कि साथ आना जरूरी है। उन्हें लगता था कि दोनों साथ में आएंगे तो पूरा मराठी वोट उन्हें ही मिलेगा। उन्हें ये पता ही नहीं था कि मराठी वोटर संकुचित भावना वाला नहीं होता है। वह व्यापक विचार करने वाला है। दो चुनाव हमने उनके खिलाफ लड़ा और सबसे बड़ी पार्टी मुंबई में हम रहे। मराठी वोटरों ने हमें समर्थन दिया, हमारा स्टेबल वोट है। लेकिन उन दोनों का मानना था कि साथ में आने से उनकी खोई हुई जमीन वापस उन्हें मिल जाएगी लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। वो बार-बार कहते हैं कि मराठीजनों के अस्तित्व की लड़ाई है, मैं कहता हूं कि मराठी जनों के अस्तित्व को कुछ नहीं हो सकता है। ये दोनों भाइयों के अस्तित्व की लड़ाई है। राज ठाकरे सबसे बड़े 'लूजर' होंगे। राज ठाकरे का फायदा उद्धव ठाकरे को मिलेगा लेकिन उद्धव का फायदा राज ठाकरे को नहीं मिलने वाला है।

सवाल :- आपके सहयोगी अजित पवार कई जगहों पर अलग लड़ रहे हैं और सुप्रिया सुले के केंद्र में जाने की चर्चा अक्सर हो रही है? आपकी क्या राय है?

जवाब :- अजित दादा पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ में अलग लड़ रहे हैं। हमने पहले से ही इसकी घोषणा की थी कि कुछ जगहों पर हम ही लोग हैं, ऐसे जगह अगर हम अलायंस करेंगे तो ये कार्यकर्ताओं का चुनाव है। कार्यकर्ता नाराज होंगे और साथ ही हम अपने विरोधियों को भी उभरने की जगह दे दें। ऐसे में हम फ्रेंडली फाइट करेंगे। फ्रेंडली फाइट करते-करते वो थोड़े अनफ्रेंडली हो गए। उन्होंने हमारे ऊपर कुछ बातें कहीं, उनका हमने जवाब नहीं दिया क्योंकि मैं अपने वादों और बातों का पक्का हूं। मैं इसका जवाब विकास से दूंगा। मुझे लगता है कि ये लोकल चुनाव है, इसका गठबंधन और हमारी सरकार पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। जहां तक सुप्रिया सुले का सवाल है, उनके लिए न तो ऐसी कोई बातचीत है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। वैसे मेरी शुभकामनाएं सबके साथ हैं।

सवाल :- नितेश राणे कहते हैं कि 15 जनवरी के बाद बांग्लादेशी और रोहिंग्या को रहने नहीं देंगे, क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है? क्या चुनाव में जीत के बाद अवैध मजारों पर बुलडोजर चलने वाला है?

जवाब :- पहली बात ये है कि पिछले एक साल में अप्रत्याशित बंगलादेशियों को खोज निकाला गया है और भारत सरकार की मदद से उन्हें डिपोर्ट भी किया है। हम अभी भी पहचान कर रहे हैं। बांग्लादेशी पहले बंगाल में आते हैं, वहां सरकार की मदद से कागजात बनवाते हैं। फिर वहां से मुंबई आ जाते हैं। ऐसे में हमें उन्हें खोजना मुश्किल हो जाता है। वे दिखते भी हमारे बंगाली भाइयों की तरह हैं और बात भी वैसी ही करते हैं। ऐसे में उन्हें खोजना मुश्किल हो जाता है। हम लोग अभी आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर एक टूल तैयार कर रहे हैं। ये एआई बेस्ड टूल है, जिससे इनकी पहचान आसान हो जाएगी। उसका 60 प्रतिशत काम हो चुका है। दो-तीन महीने में उसकी एक्यूरेसी 100 प्रतिशत तक ले जाएंगे और फिर हम बांग्लादेशियों की खोज शुरू करेंगे। सबको डिपोर्ट कर देंगे। जहां तक बुलडोजर एक्शन का सवाल है, हम अवैध निर्माण को तोड़ेंगे ही।

सवाल :- पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि जिस तरह मादुरो को उठा ले गए, उसी तरह पीएम मोदी को भी ट्रंप उठा ले जाएंगे, इस पर क्या कहना चाहेंगे?

जवाब :- मैं पृथ्वीराज चव्हाण को एक मंझा हुआ नेता मानता हूं। वह पीएम ऑफिस में भी काम कर चुके हैं। उन्हें फॉरेन पॉलिसी की अच्छी जानकारी है। उनके जैसे नेता जब इस तरह के बयान देते हैं तो दुःख और निराशा होती है। कभी-कभी राजनीति में ऐसा समय आता है, जब आप परेशान रहते हैं, कहीं सफलता नहीं मिल रही होती और गली से लेकर दिल्ली तक आप और आपकी पार्टी हारती है, तो ऐसे समय में संयम बरतना बड़े नेताओं का काम होता है। इस तरह के बयान देकर वह अपनी हंसी और अपने देश की हंसी उड़वाते हैं। इस प्रकार के बयान पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर चलते हैं। इससे हमारी फॉरेन पॉलिसी को चोट पहुंचती है और देश को नुकसान होता है। उनके जैसे नेता को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए।

सवाल :- ईडी रेड के दौरान ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं और फाइल लेकर चली गईं, एजेंसी के लोगों पर हमला होता है, इसके पीछे की वजह क्या है?

जवाब :- संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं। कुछ राज्य के हैं और कुछ सरकार के अधिकार हैं। इन अधिकारों से जो केंद्र की एजेंसियां तैयार हुई हैं। उनका अपना जांच का अधिकार है। उस जांच के अधिकार में राज्य सरकार, राज्य की जांच एजेंसी, स्टेट का मुख्यमंत्री भी दखलंदाजी नहीं कर सकता है। अगर आपको लगता है कि जांच गलत हुई है तो आप कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट को अधिकार है, उस पर एक्शन ले सकता है। लेकिन जांच के बीच जाकर ये सब करना गैरकानूनी है। अगर कानून के हिसाब से जाएं तो उनके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में आपराधिक केस दर्ज हो सकता है। संवैधानिक रूप से भी ये गलत है। संवैधानिक रूप से तैयार की गई एजेंसी के काम में इस प्रकार रुकावट डालना साबित करता है कि आप संविधान को नहीं मानते हैं और आपके राज्य में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है। ये उनके हार का डर है। उनका चेहरा लोगों के सामने आ गया है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है। उस पर ममता दीदी कुछ नहीं बोलती है, लेकिन बांग्लादेशियों को पनाह देकर अपना वोटर बना रही हैं। इसके दम पर वह चुनाव जीतना चाहती हैं।

सवाल :- अन्नामलाई के बयान को लेकर विपक्ष ने जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की, उद्धव-राज ठाकरे उन पर निशाना साध रहे हैं, इस पर क्या कहेंगे?

जवाब :- ये गलत है, अन्नामलाई ने बॉम्बे शब्द कहा है। हम भी तमिलनाडु जाते थे तो हम भी चेनई को मद्रास कहते थे। सालों से हम उन्हें मद्रासी कहते थे, अब उन्हें ये अच्छा नहीं लगता है क्योंकि अब वह मद्रास नहीं है, लेकिन हम उनका अपमान करने के लिए नहीं कहते हैं। ऐसे ही बातें बाहर से आने वाले लोगों से होती है। सालों से लोग मुंबई को बॉम्बे कहते आ रहे हैं, तो कह देते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की मुंबई नाम का विरोध कर रहे हैं। वो मुंबई, मराठी का अपमान नहीं करना चाहते थे। उन्होंने सिर्फ यह कहा कि आप लोग जो लोगों के साथ मारपीट करते हैं, ये एक आइसोलेटेड शहर नहीं बल्कि इंटरनेशनल सिटी है। उनका कहना था कि मुंबई को सिर्फ महाराष्ट्र का एक शहर मत मानिए। मुझे नहीं लगता है कि उन्होंने कुछ गलत कहा है। हमारी क्षेत्रीय अस्मिता है, मराठी होने का अभिमान है, लेकिन इसका मतलब नहीं है कि किसी अन्य भाषा के लोगों को परेशान करें। अगर मराठी आदमी को तमिलनाडु में परेशान किया जाए तो हमें तो बुरा लगेगा ही। राज ठाकरे की सड़कछाप भाषा के इस्तेमाल की आदत है। मुझे लगता है कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करके उन्हें हेड लाइन में जगह मिल जाती है, वही बटोर लेते हैं।

सवाल :- आप लोग आरोप लगाते हैं कि राज ठाकरे हिंदुत्व छोड़ चुके हैं, ऐसा क्यों? आज की राजनीति में अरविंद केजरीवाल कितने सार्थक हैं?जवाब :- उद्धव ठाकरे की रैली में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं। उनकी रैली में मुंबई बम विस्फोट के आरोपी शामिल होकर वोट मांगते हैं। छत्रपतिसंभाजीनगर में रशीद मामू को वो टिकट देते हैं। अब उनके लोग मस्जिदों में जाकर कह रहे हैं कि उद्धव ठाकरे जीतकर आते हैं तो मस्जिदों के लाउडस्पीकर को फिर लगवा देंगे। ये सारी बातें क्या इशारा करती हैं? हम हिंदुत्ववादी हैं लेकिन हमारा हिंदुत्व संकुचित नहीं है। हमने हमेशा कहा है कि जो भारत की संस्कृति को अपनी संस्कृति मानता है और जो प्राचीन भारत की परम्परा को मानता है, चाहे उसकी पूजा पद्धति कोई भी हो, हम उसे हिन्दू मानते हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने तुष्टिकरण का काम शुरू किया है, ये हमें मंजूर नहीं है। बाला साहेब ठाकरे ने जिसकी सबसे अधिक खिलाफत की, अब वही करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि उन्होंने हिंदुत्व छोड़ दिया है। जहां तक अरविंद केजरीवाल का सवाल है, उनका वजूद नहीं दिखाई देता है। वे और उनकी पार्टी एक्सपोज हो चुके हैं। महाराष्ट्र के इस चुनाव में उनका कोई अस्तित्व नहीं है।

सवाल :- ऐसा क्या है कि चुनाव के नतीजों से पहले महायुति के कई उम्मीदवार जीत गए? क्या यह सरकार का लोगों के प्रति काम दिखाता है या विपक्ष का आरोप कि आप लोग सत्ता और धन का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं?

जवाब :- ये जो लोग इंडिपेंडेंट आए, ये इसीलिए आए क्योंकि विपक्ष को उम्मीदवार ही नहीं मिला। केवल हमारे ही नहीं आए, बल्कि इस्लामिक पार्टी के भी उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर ली है। आपको उम्मीदवार नहीं मिलते तो हम क्या करें? अगर हम लोग धन, बल का इस्तेमाल करते तो मुंबई में ऐसा क्यों नहीं हुआ? किरीट सोमैया से ये लोग काफी नाराज रहे हैं और उनपर हमलावर भी रहे हैं। किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया चुनाव लड़ रहे हैं। नील सोमैया के खिलाफ कांग्रेस, शरद पवार और उद्धव ठाकरे को भी उम्मीदवार नहीं मिला। एक इंडिपेंडेड आदमी उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहा है। अब मुझे बताइए कि नील सोमैया के खिलाफ आपने उम्मीदवार क्यों नहीं खड़ा किया? आप उम्मीदवार खड़ा करके वापस लेते हो और आरोप हमारे ऊपर लगाते हो? इसका मतलब ये है कि लोग आपके साथ नहीं है।

सवाल :- वसई-विरार में आपने हिंदी में भाषण दिया, इस पर संजय राउत ने आपत्ति जताई।

जवाब :- मैं मराठी बोलूं, हिन्दू या अंग्रेजी बोलूं, इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवा सकता क्योंकि हिंदी और अंग्रेजी में बोलना मतलब मराठी का विरोध नहीं है। मराठी मेरी मातृभाषा है, हमेशा मेरे लिए सर्वोच्च है। उसके साथ ही साथ भारत की सभी भाषाएं सम्मानजनक हैं। अंग्रेजी एक तरह से संपर्क की भाषा के तौर पर आगे बढ़ी है, उसको लेकर मेरा कोई विवाद नहीं है, लेकिन इनसे एक सवाल है कि आप भारतीय भाषाओं का विरोध करते हो और अंग्रेजी के लिए रेड कार्पेट डालते हो, ये कौन सी नीति है? मराठी अपनी भाषा है और कहते हो कि इसके अलावा कोई और भाषा नहीं चलेगी तो अंग्रेजी क्यों चलती है? क्या कारण है? वो तो अंग्रेजों की भाषा है। हिंदी या देश की अन्य भाषाओं में संस्कृत के शब्द हैं। जितने लोग हिंदी या अन्य भाषाओं का विरोध कर रहे हैं, उनके बेटे मराठी मीडियम से पढ़े भी नहीं हैं। ये बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं और बात मराठी की करते हैं। इनके खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग हैं।

--आईएएनएस

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