अहमदाबाद: सिविल अस्पताल में निराश पिता के बेटी को मिली आंखों की रोशनी, सरकार और डॉक्टरों को जताया आभार
गांधीनगर, 25 अगस्त (आईएएनएस)। इस खूबसूरत दुनिया और इसके अनगिनत रंगों को देखने के लिए आंखों की रोशनी सबसे जरूरी है। यह बात अच्छी तरह जानते हुए गुजरात के अहमदाबाद के एक पिता अपनी मासूम बेटी की आंखों की रोशनी वापस लाने की उम्मीद में उसे कई अस्पतालों और डॉक्टरों के पास ले गए, लेकिन उन्हें कहीं से भी उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आई। हालांकि, अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की डॉ. जागृति ने वह कर दिखाया, जिसे बाकी सभी ने नामुमकिन माना था।
इसी को लेकर पिता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि मैंने अपनी बेटी का इलाज कई प्राइवेट अस्पतालों और अहमदाबाद की कई जगहों पर करवाया, लेकिन हमें किसी भी डॉक्टर से ऐसा जवाब नहीं मिला कि आपका बच्चा देख सकता है। मैंने अपनी बच्ची को 2015 में इस सिविल अस्पताल लाया था और डॉ. जागृति मैडम ने आज उसी बच्चे को देखने लायक बना दिया है, जिसे सभी प्राइवेट डॉक्टर कह रहे थे कि आपका बच्चा कभी देख नहीं सकता।
आज मेरे बच्चे को यहां लाए 12 वर्ष हो गए हैं। जब वह करीब एक वर्ष की थी तो डॉ. जागृति मैडम ने उसकी दोनों आंखों का इलाज किया और वह अब पिछले एक वर्ष से देख सकती है। फिलहाल उसकी उम्र 12 वर्ष की हो गई है। जागृति मैडम ने ही इसका इलाज किया है और मैं जागृति मैडम का बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूं। मैं इस हॉस्पिटल का और सरकार का भी बहुत शुक्रगुजार हूं कि हमें इस हॉस्पिटल में इलाज मिलता है और यहां के सभी डॉक्टर सहयोग और सपोर्ट करते हैं।
बच्ची ने बताया कि मेरा ऑपरेशन एक वर्ष पहले हुआ था। अब मैं 12 वर्ष की हूं। मैं सब कुछ देख सकती हूं और मैं इस हॉस्पिटल के काम के लिए बहुत शुक्रगुजार हूं। मैं अभी छठी क्लास में पढ़ रही हूं और मेरी नजर पूरी तरह साफ है। उन्होंने कहा कि मैं अब अपने दोस्तों के साथ खेल भी सकती हूं। इसके लिए मैं जागृति मैडम को भी धन्यवाद करती हूं, जिनकी इलाज की वजह से आज में जो करना चाहती, सबकुछ कर सकती हूं।
बता दें कि एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी वेस्टर्न रीजन का सबसे बड़ा आई हॉस्पिटल है। यह 200 बेड का हॉस्पिटल है, और यहां सुपर स्पेशियलिटी आई वर्क, कैटरेक्ट सर्जरी, लो विजन एड्स, ऑर्बिट और ऑकुलोप्लास्टी, और आई कैंसर—ये सभी काम बहुत अच्छे से किए जाते हैं। इस इंस्टिट्यूट में 150 से ज्यादा रेजिडेंट डॉक्टर ट्रेंड हैं। इसके अलावा, एनपीसीबी प्रोग्राम के तहत, हम देश के सभी डिस्ट्रिक्ट लेवल सर्जन को ट्रेनिंग देते हैं।
वहीं, अस्पताल की एक डॉक्टर ने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मंगलवार को एक खास प्रोग्राम है, जो 41वां आई डोनेशन फोर्टनाइट है। यह प्रोग्राम पूरे देश में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद अवेयरनेस पैदा करना, अवेयरनेस बढ़ाना, आई डोनेशन को लेकर समाज में जो गलतफहमियां हैं, उन्हें दूर करना और आई डोनेशन को प्रमोट करना है।
उन्होंने कहा कि यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि आईबॉल की वजह से दृष्टिहीनता के मामले बहुत ज्यादा हैं और दूसरी तरफ आईबॉल की अवेलेबिलिटी बहुत कम है। इसलिए अगर हमें ज्यादा आईबॉल मिलें तो हम ज्यादा काम कर सकते हैं, ताकि लोगों को आईबॉल की वजह से जो समस्या होती हैं, उन्हें असरदार तरीके से दूर किया जा सके। हमारे इंस्टीट्यूशन में लिए गए आईबॉल्स का यूटिलाइजेशन यानी उनका कंजम्प्शन बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा अगर आईबॉल बहुत अच्छे हैं तो उनका ऑपरेशन किया जा सकता है। उनका इस्तेमाल रिसर्च के लिए किया जा सकता है। मेडिकल स्टूडेंट्स उस पर सर्जरी सीख सकते हैं।
--आईएएनएस
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