आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, और संजय राउत के खिलाफ मानहानि मामले पर 21 अक्टूबर को होगी सुनवाई
मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद संजय राउत तथा अन्य के खिलाफ दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर 2,000 करोड़ रुपए के मानहानि मुकदमे में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
वादी पक्ष के अनुसार, मुकदमे में कार्यालयीन आपत्तियां दूर किए जाने के बाद सिविल जज, सीनियर डिवीजन, ठाणे की अदालत ने मामले को प्रारंभिक सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। संबंधित प्रतिवादियों को मुकदमे की नोटिस तथा प्लेंट (वादपत्र) की प्रतियां भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
सतीश सालियान की ओर से अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल और अधिवक्ता तनवीर निजाम अदालत में उपस्थित होकर प्रतिवादियों के खिलाफ अंतरिम राहत की मांग करेंगे।
वादी पक्ष द्वारा अदालत के समक्ष जो मुख्य रूप से राहतें मांगी जाएंगी, उनमें आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, संजय राउत तथा अन्य प्रतिवादियों द्वारा सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर प्रकाशित कथित मानहानिकारक आरोपों, वीडियो, पोस्ट और बयानों को तत्काल हटाने तथा भविष्य में ऐसे आरोपों के पुनः प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग, वादी सतीश सालियान और उनके वकीलों की प्रतिष्ठा को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले बयानों के लिए संबंधित प्रतिवादियों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का निर्देश देने की मांग, मानहानि के मुकदमे में दावा की गई 2,000 करोड़ रुपए की राशि सुरक्षित रखने के लिए प्रतिवादियों को अदालत में बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का आदेश देने की मांग, वादी पक्ष कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रतिवादियों की संपत्ति की कुर्की तथा आवश्यक परिस्थितियों में सिविल जेल भेजने सहित कठोर अंतरिम कार्रवाई की भी मांग शामिल हैं।
वादी पक्ष का आरोप है कि दिशा सालियान की मौत के मामले में न्याय की मांग कर रहे उनके पिता सतीश सालियान तथा उनके अधिवक्ताओं के खिलाफ लगातार अपमानजनक, भ्रामक और मानहानिकारक बयान देकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
वादी पक्ष के अनुसार, न्यायालयीन कार्यवाही तथा जांच से जुड़े तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए सतीश सालियान की न्यायिक लड़ाई को राजनीतिक साजिश बताने और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाले बयान दिए गए।
अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल और अधिवक्ता तनवीर निजाम की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा जाएगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी व्यक्ति के सम्मान और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का असीमित अधिकार नहीं देती। वादी पक्ष इन कथित मानहानिकारक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के लिए प्रभावी अंतरिम आदेश की मांग करेगा।
महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान प्रतिवादियों के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने, सार्वजनिक माफी, 2,000 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी, संपत्ति कुर्की और सिविल जेल से संबंधित अंतरिम राहतों के लिए वादी पक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करेगा।
--आईएएनएस
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