Aapka Rajasthan

अदालत में जो हो रहा है वो मजाक जैसा, सीजेपी लीगल हेड रत्ना सिंह ने कार्यवाही पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद उनके वकीलों और संगठन के पदाधिकारियों ने अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता अभिक चिमनी, पुष्प शर्मा, सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह और प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने हिरासत बढ़ाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कार्यवाही में प्रक्रियागत अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आदेश को चुनौती देने की बात कही।
 

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद उनके वकीलों और संगठन के पदाधिकारियों ने अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता अभिक चिमनी, पुष्प शर्मा, सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह और प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने हिरासत बढ़ाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कार्यवाही में प्रक्रियागत अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आदेश को चुनौती देने की बात कही।

सौरव दास और आशुतोष रांका का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अभिक चिमनी ने बताया कि जब वे अदालत पहुंचे, तब तक पांच दिन की हिरासत की अवधि पूरी हो चुकी थी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानतदारों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट या वैध नहीं माना था। इसके बाद वे नए जमानतदारों के दस्तावेज लेकर अदालत पहुंचे।

वहीं, अधिवक्ता अभिष्त हेल ने हिरासत की अवधि और सुनवाई की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों को पहले इन्हीं तथ्यों के आधार पर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पांच दिन की हिरासत पूरी होने के बाद मामले पर दोबारा सुनवाई हुई। तकनीकी रूप से अब न्यायिक हिरासत के छह दिन हो चुके हैं।

दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने पर सीजेपी लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने अदालत की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अदालत में जो कुछ हो रहा है, वह मजाक जैसा है। कार्यवाही में कानून के पहलुओं पर उचित चर्चा नहीं हुई।

रत्ना सिंह ने कहा कि मुझे नहीं पता कि अब इसे अदालत कहना भी चाहिए या नहीं, क्योंकि यहां कानून के नजरिए से कोई बात ही नहीं हुई है। उन्होंने अदालत में हुई कार्यवाही को न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया और पूरे मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि किस तरह किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलते हुए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने अन्य अदालतों से भी इस मामले में सामने आकर स्थिति पर ध्यान देने की अपील की।

सीजेपी प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने भी हिरासत बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कुछ हो रहा है, वह निंदनीय है। उन्होंने पूछा कि क्या अदालतों में न्याय की प्रक्रिया ऐसी ही होनी चाहिए। पसरीचा ने कहा कि उन्हें पता है कि दोनों नेताओं के मामले में क्या हुआ है और उन्होंने सवाल किया कि आखिर इन दोनों युवकों ने कौन सा अपराध किया है।

दोनों की ओर से पेश अधिवक्ता पुष्प शर्मा ने भी अदालत की कार्यवाही की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी पहलुओं के बजाय राजनीतिक रूप से सही दिखने की कोशिश की जा रही है। शर्मा ने कहा कि वे कानूनी रूप से सही होने के बजाय राजनीतिक रूप से सही होने की कोशिश कर रहे हैं। अंदर जो कुछ हो रहा है, वह कानून और न्याय के लिहाज से चौंकाने वाला और बेतुका है।

--आईएएनएस

पीएसके/वीसी