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उमर खालिद पर फिल्म स्क्रीनिंग को लेकर एबीवीपी बोली- कैंपस प्रोपेगैंडा का प्लेटफॉर्म नहीं, वीएचपी ने दी चेतावनी

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एबीवीपी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। संगठन के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में चर्चा और असहमति की जगह है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।
 

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एबीवीपी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। संगठन के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में चर्चा और असहमति की जगह है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।

एबीवीपी के सिटी सेक्रेटरी अभिनंदन मिर्जी ने कहा, "ये चीजें बेंगलुरु में हो रही हैं। शैक्षणिक संस्थान सही चर्चा और बहस की जगह होने चाहिए और हम मानते हैं कि बोलने की आजादी में असहमति भी शामिल है, लेकिन उस असहमति की एक लिमिट होनी चाहिए। असहमति के नाम पर आप देश की एकता और देश की संप्रभुता पर सवाल नहीं उठा सकते या देश विरोधी चीजों का समर्थन नहीं कर सकते। इस आदमी पर आतंकवाद का आरोप है और उसने आतंकवादी अफजल गुरु के साथ हमदर्दी जताते हुए भाषण दिए हैं। इसलिए अगर वे कैंपस के बाहर उसके बारे में कोई फिल्म शूट या स्क्रीनिंग करते हैं तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।"

एबीवीपी के उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध करने पर भाजपा नेता राम कदम ने कहा, "यूनिवर्सिटी विचारों के लिए एक प्लेटफॉर्म है, लेकिन यह किसी खास विचारधारा को प्रमोट करने का प्लेटफॉर्म नहीं बन सकता। अगर कोई आइडिया पेश करना है, तो तर्कों के आधार पर उसके फैक्ट्स भी पेश करने होंगे, उसके बाद डिस्कशन और डायलॉग होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा के लिए बनी कोई संस्था बिना डिस्कशन या डायलॉग के प्रोपेगैंडा का प्लेटफॉर्म बन जाए तो उसका स्वागत कैसे किया जा सकता है? अगर आप किसी आइडियोलॉजी को प्रमोट कर रहे हैं तो उस आइडियोलॉजी का आधार क्या है? हम ऐसे विचारों का विरोध कर रहे हैं। विचार जरूर पेश किए जाने चाहिए, लेकिन उन्हें पेश करने से पहले उनका आधार भी बताया जाना चाहिए। 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारों और टुकड़े-टुकड़े गैंग जिस तरह की विचारधारा को प्रमोट करता है, उससे यह देश कैसे तरक्की कर सकता है।

एबीवीपी छात्र संगठन के उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध करने पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "'टुकड़े-टुकड़े' गैंग से जुड़े राष्ट्र विरोधी तत्वों के पतन का समय आ गया है। उन्हें यह समझना होगा कि यह एक नया भारत है और इसे नए नजरिए से देखना होगा। देशद्रोह, धार्मिक विश्वासघात और बगावत अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी, वरना इसके गंभीर नतीजे होंगे।"

कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भाजपा के कहने पर राजनीति करती है। इसे बहुत तवज्जो नहीं दिया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

केके/वीसी