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अभिलाष थपलियाल ने तापसी के फिल्मों के चयन को सराहा, कहा- हर बार नया मुकाम बनाती हैं

मुंबई, 3 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री तापसी पन्नू अपने दमदार अभिनय और शानदार फिल्मों के चयन को लेकर जानी जाती हैं। अब तापसी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'गांधारी' से फिर से दर्शकों का मनोरंजन कर रही हैं। गुरुवार को अभिनेत्री के मित्र और अभिनेता अभिलाष थपलियाल ने सभी से फिल्म को देखने की गुजारिश की।
 

मुंबई, 3 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री तापसी पन्नू अपने दमदार अभिनय और शानदार फिल्मों के चयन को लेकर जानी जाती हैं। अब तापसी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'गांधारी' से फिर से दर्शकों का मनोरंजन कर रही हैं। गुरुवार को अभिनेत्री के मित्र और अभिनेता अभिलाष थपलियाल ने सभी से फिल्म को देखने की गुजारिश की।

अभिलाष थपलियाल ने इंस्टाग्राम पर अभिनेत्री तापसी पन्नू के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें उन्होंने उनके अभिनय और फिल्मों के चयन की भी सराहना की।

अभिनेता ने लिखा, "अभिनेत्री तापसी पन्नू ने जो फैसले लिए हैं, वो उन्हें इस इंडस्ट्री की हर दूसरी स्टार से अलग बनाते हैं। 'पिंक' से लेकर 'मुल्क', 'थप्पड़', 'मनमर्जियां' और 'अस्सी' तक। उन्होंने हर बार अपने अभिनय से चौंकाया है।"

अभिनेता अभिलाष थपलियाल ने सभी से फिल्म 'गांधारी' देखने की अपील की। अभिनेत्री ने लिखा, "नेटफ्लिक्स पर 'गांधारी' उस अभिनेत्री के लिए जरूर देखें, जो हर बार नया मुकाम बनाती हैं। इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बेहतरीन और सबसे बहादुर एक्ट्रेस में से एक तापसी पन्नू के नाम।"

अभिनेता अभिलाष थपलियाल की पोस्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं, तापसी पन्नू ने भी कमेंट सेक्शन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "यहां सर्वाइव करने का एक वीर चक्र होना चाहिए।"

अभिनेत्री के इस कमेंट पर अभिलाष ने भी रिप्लाई देते हुए लिखा, "तापसी पन्नू, माहेश्वरी जी ने लिखा था, और शायद आपके ही लिए होगा, प्रात: हो कि रात हो, संग हो न साथ हो। सूर्य से बढ़े चलो, चंद्र से बढ़े चलो। वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो!"

देवाशीष मखीजा द्वारा निर्देशित फिल्म में तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, छाया कदम, मीता वशिष्ठ और स्वास्तिका मुखर्जी मुख्य भूमिका में हैं।

फिल्म की कहानी 'बानी' (तापसी पन्नू) नाम की एक मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पति गोकुल (इश्वाक सिंह) और बेटी मिष्ठी के साथ जॉयपुरा शहर में रहती है। रेलवे स्टेशन पर बानी की बेटी का अपहरण हो जाता है और एक हिंसक हमले में बानी अपनी आंखों की रोशनी भी खो बैठती है। इसके बाद बानी अपनी बेटी को ढूंढने और बाल तस्करों के एक खतरनाक गिरोह का सामना करने के लिए आंखों पर पट्टी बांधकर खुद मैदान में उतरती है।

--आईएएनएस

एनएस/एबीएम