आखिर कैसे भारत बन रहा है ओलंपिक 2036 की मेजबानी का प्रबल दावेदार?
नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। भारत लंबे समय से खेलों की दुनिया में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें उसने काफी हद तक सफलता भी हासिल की है। ऐसे में ओलंपिक गेम्स 2036 की मेजबानी का दावा पेश करना देश के लिए एक बड़ा मौका है। हालांकि, ओलंपिक में भारत का अब तक का प्रदर्शन और दूसरे देशों की मजबूत दावेदारी इस राह में बड़ी चुनौतियां हैं, लेकिन कई ऐसे कारण हैं जो भारत को मजबूत दावेदार के रूप में पेश करते हैं।
सबसे पहले, बीते कुछ वर्षों में भारतीय खेलों का स्तर लगातार बेहतर हुआ है। सरकार की ओर से खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान दिया गया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने भारतीय एथलीट्स को आगे बढ़ने का दिया है। एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय एथलीट्स की उपलब्धियां इस बदलाव को दिखाती हैं।
दूसरी तरफ, दुनिया में अब खेलों के बड़े आयोजनों की मेजबानी को केवल खेल तक सीमित नहीं देखा जाता। खासकर विकासशील देशों के लिए ऐसे आयोजन अपनी आर्थिक क्षमता, सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक प्रभाव दिखाने का माध्यम बन गए हैं। ओलंपिक जैसे आयोजन से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का मौका मिलता है।
इन आयोजनों में सार्वजनिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों, अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों और निजी कॉर्पोरेट प्रायोजकों शामिल होते हैं, इसलिए ये मेजबान देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए बेहतरीन अवसर पैदा करते हैं।
भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता से उठाया था। इसके अलावा वैक्सीन कूटनीति और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका निभाई है। ऐसे में 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत को ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को और मजबूती से दुनिया के सामने रखने का अवसर दे सकती है।
टोक्यो, सोल और बीजिंग ओलंपिक ने इन देशों की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी थी। भारत भी इसी तरह 2036 के खेलों के जरिए अपनी बढ़ती आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है। इसके लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, आधुनिक हवाई अड्डे, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और विश्वस्तरीय खेल परिसरों का विकास अहम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी केवल खेल आयोजन हासिल करने की कोशिश नहीं है। यह देश के बुनियादी ढांचे, आर्थिक विकास, वैश्विक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई दिशा देने का एक बड़ा अवसर भी है।
--आईएएनएस
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