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राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा आज बदल चुकी हैः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है। अब सुरक्षा केवल इस बात से तय नहीं होती कि हमारी सेनाएं कितनी बड़ी हैं। यह भी मायने रखता है कि सेना जिन क्षमताओं पर निर्भर करती है, उन्हें हम स्वयं विकसित और तैयार कर सकते हैं या नहीं। देश की जरूरत के हथियारों का निर्माण और उनका नियंत्रण अपने हाथ में होना भी जरूरी है।
 

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है। अब सुरक्षा केवल इस बात से तय नहीं होती कि हमारी सेनाएं कितनी बड़ी हैं। यह भी मायने रखता है कि सेना जिन क्षमताओं पर निर्भर करती है, उन्हें हम स्वयं विकसित और तैयार कर सकते हैं या नहीं। देश की जरूरत के हथियारों का निर्माण और उनका नियंत्रण अपने हाथ में होना भी जरूरी है।

रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के चैंपियंस पुरस्कार समारोह में यह बातें कहीं। उन्होंने रक्षा उत्पादन की गति बढ़ाने और देश की विनिर्माण क्षमता को जरूरत के अनुसार विस्तार देने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “जब देश की सुरक्षा की बात आए, तो गति सबसे ज्यादा मायने रखती है। मुझे पूरा विश्वास है, कि आप सभी उद्योग क्षेत्र से जुड़े हुए लोग, हमारी उत्पादन क्षमता को आवश्यकतानुसार बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे। इस पर कुछ नए, नवाचारी और क्रांतिकारी समाधान भी ले कर आएंगे।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में सरकार बनने के समय से ही प्रधानमंत्री का विशेष ध्यान रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर रहा है। आज भारत का रक्षा उद्योग वैश्विक निर्यात के क्षेत्र में काफी आगे पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा, “एक समय था जब भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था। लेकिन आज हम उन्नत सैन्य उपकरणों के, एक विश्वसनीय और भरोसेमंद निर्यातक के रूप में उभर रहे हैं। यह बदलाव छोटा नहीं है। यह ऐतिहासिक है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 45.16 प्रतिशत रही।

राजनाथ सिंह ने कहा, “जहां तक रक्षा क्षेत्र का प्रश्न है, हमने पिछले कुछ वर्षों में, जो नीतियां बनाई हैं, चाहे वह रक्षा खरीद प्रक्रिया हो, चाहे रक्षा खरीद नियमावली हो, चाहे सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची हों, सृजन पोर्टल हो, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार हो, इन सबका एक ही उद्देश्य है। वह उद्देश्य है, हमारे निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं को और उड़ान देना।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने उद्योगों की भागीदारी को बढ़ावा दिया है। अब उद्योग स्वयं तय कर सकते हैं कि कौन-सी तकनीक विकसित करनी है, किस बाजार में जाना है और किसके साथ साझेदारी करनी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने औद्योगिक भागीदारी को बहुत बढ़ावा दिया है। आज हम भागीदारी के दृष्टिकोण से कहीं आगे बढ़कर, स्वायत्तता तक पहुंच चुके हैं। यानी आज आप खुद तय करें, कि तकनीक कौन सी बनानी है। आप खुद तय करें कि बाजार कौन सा है। आप खुद तय करें कि साझेदार कौन होगा। सरकार हर मामले में आपके साथ खड़ी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने नीतियां बनाईं, प्रक्रियाओं को सरल किया और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के साथ नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएसएच