आधुनिक तकनीक और निवेश से भारतीय चीज़ उद्योग को मिली नई गति: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और निवेश से भारतीय चीज़ उद्योग को नई गति मिली है। बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता सुधार के कारण भारतीय चीज़ अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान बना रही है और देश का डेयरी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में खाने-पीने की परंपरा सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही है। इसी परंपरा का एक दिलचस्प हिस्सा है भारत की चीज़। ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चीज प्रतियोगिता में भारतीय चीज के दो ब्रांडों को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। इस उपलब्धि की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हुई। कई लोगों ने सुझाव भी दिया कि भारत में चीज़ की जो विविधता है उस पर भी बात होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के डेयरी सेक्टर में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। इस सेक्टर में मूल्य संवर्धन ने हमारे पारंपरिक स्वाद को एक नई पहचान दी है। आज भारतीय चीज दुनिया-भर में अपनी जगह बना रही है। ब्रेकफास्ट हो, लंच हो या डिनर दुनिया की प्लेटों में भारत का स्वाद पहुंच रहा है। जम्मू-कश्मीर की कलारी चीज (कश्मीर का मोजेरेला) भी काफी पसंद किया जाता है। गुज्जर-बकरवाल समुदाय के लोग पीढ़ियों से इसे बनाते और खाते आए हैं। वहीं सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में 'छुरपी' बहुत प्रसिद्ध है। पहाड़ों की सादगी और कोमलता इसके स्वाद में भी महसूस होती है। इस चीज की खास बात यह है कि इसे याक के दूध से बनाया जाता है। महाराष्ट्र और गुजरात में 'टोपली नु पनीर' जिसे 'सुरती चीज' भी कहा जाता है, भी अपनी एक अलग पहचान रखता है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज इस परंपरा को नई ताकत मिल रही है। अनेक भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। आधुनिक तकनीक आ रही है, बेहतर पैकेजिंग हो रही है और हमारे उत्पाद विश्व मानक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी का परिणाम है कि भारतीय चीज अब देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया के बाजारों और रेस्तरां तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि आज हम लोकल से ग्लोबल की बात करते हैं, उसमें भारतीय चीज का उदाहरण हमें आगे की दिशा दिखाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि तेजी से बदलते हुए इस समय में टैकनोलजी हमारी ज़िंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई है। आज हम अपने अतीत को वर्तमान से जोड़ने में भी तकनीक का कमाल देख रहें हैं। इस दिशा में हाल ही में एक ऐसा विकास हुआ है जिससे शिक्षा से जुड़े लोग और इतिहास में रुचि रखने वाले बहुत खुश हुए हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने एक विशेष पोर्टल पर एक अनोखा डेटाबेस शेयर किया है। इस संस्था ने 20 करोड़ से भी ज्यादा अमूल्य दस्तावेजों को डिजिटाइज कर सार्वजनिक किया है। इनमें से कुछ तो बहुत ही दिलचस्प हैं 7वीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियां भोजपत्र पर लिखी हुई हैं। यहां आपको 8वीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ श्री भुवालय भी देखने को मिलेगा। अंकों पर आधारित यह ग्रंथ एक ग्रिड के रूप में है। रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े कुछ अहम पत्र भी आप यहां देख सकते हैं। इनसे 1857 में उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों का पता चलता है, जो उनके पराक्रम को दर्शाते हैं।
पीएम ने कहा कि जो लोग नेताजी सुभाष के प्रशंसक हैं उनके लिए यहां नेताजी के जीवन, आजाद हिन्द फौज और उनके भाषण से जुड़े कई दस्तावेज हैं। पंडित मदन मोहन मालवीय से जुड़े कई दस्तावेज भी मिलेंगे। इनमें बीएचयू की स्थापना और हिन्दी साहित्य सम्मेलन से जुड़ी अहम जानकारियां हैं। यहां हमारे संविधान सभा से जुड़े कई अनोखे दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अभिले पोर्टल पर जरूर विजिट करें।
--आईएएनएस
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