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7 सितंबर का पंचांग: पापों से छुटकारा पाने के लिए करें अजा एकादशी का व्रत, दोपहर 3:59 से शाम 5:29 बजे तक रहेगा अमृत काल

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
 

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

7 सितंबर 2026 (सोमवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि शाम 5:04 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। सोमवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करना फलदाई रहेगा। मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत करने से पापों से छुटकारा मिलता है और सुख-शांति बनी रहती है।

सोमवार सुबह 6:14 बजे सूर्योदय और शाम 6:35 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 1:55 बजे चंद्रोदय और दोपहर 3:59 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि चंद्रमा शाम 6:14 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा।

सोमवार को सुबह 6:41 बजे तक व्यतीपात योग रहेगा, इसके बाद वरीयान् योग शुरू हो जाएगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 3:59 से शाम 5:29 बजे तक रहेगा।

वहीं, राहुकाल सुबह 7:47 बजे से 9:19 बजे और गुलिक काल दोपहर 1:57 से 3:30 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल सुबह 10:52 से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।

सोमवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेगा। पूर्व दिशा दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एसडी/एएस