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4 हजार करोड़ के लीजबैक मामले में नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव बर्खास्त

नोएडा, 28 सितंबर (आईएएनएस)। नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 4 हजार करोड़ रुपए के लीजबैक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
 

नोएडा, 28 सितंबर (आईएएनएस)। नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 4 हजार करोड़ रुपए के लीजबैक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

नियुक्ति विभाग की ओर से सोमवार को उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया। वर्तमान में हरीश चंद्र खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर कोलकाता में तैनात थे। हरीश चंद्र पर नोएडा प्राधिकरण में सचिव पद पर तैनाती के दौरान प्राधिकरण की अर्जित और कब्जा प्राप्त जमीन को नियमों को दरकिनार करते हुए लीजबैक कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।

इस मामले की विभागीय जांच में करीब 3 लाख 81 हजार 527 वर्गमीटर जमीन के नियम विरुद्ध लीजबैक किए जाने की बात सामने आई थी। जांच के अनुसार एक्सप्रेसवे के पास शहदरा गांव से सटी इस जमीन की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपए आंकी गई थी।

यह मामला वर्ष 2011 में नोएडा प्राधिकरण में हुए लीजबैक से संबंधित है। विभागीय जांच के दौरान सामने आया कि गांव के गैर-निवासी लोगों के अलावा तीन निजी कंपनियों के नाम भी जमीन की लीजबैक की गई थी। इन लोगों और कंपनियों को करीब 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के भूखंड लीजबैक किए गए। नियमों के अनुसार लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के किसानों के लिए निर्धारित थी। एक परिवार के नाम अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन लीजबैक किए जाने का प्रावधान था।

आरोप है कि नियमों का पालन नहीं किया गया और बाहरी लोगों तथा निजी कंपनियों को बड़े भूखंड लीजबैक कर दिए गए। जांच के दायरे में आई जमीन नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 के निकट स्थित थी। यह जमीन 45 से 75 मीटर चौड़ी सड़कों से लगी हुई बताई गई है। इसी वजह से जमीन की बाजार कीमत काफी अधिक आंकी गई।

जांच में जमीन की अनुमानित कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपए बताई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी को जांच सौंपी थी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई। रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद शासन स्तर पर विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और अब उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है।

हरीश चंद्र इससे पहले वर्ष 2018 में भी निलंबित हो चुके हैं। उस समय वह मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी पद पर तैनात थे। उन पर सेवानिवृत्त कर्नल वीएस चौहान को एक मामले में जेल भेजने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप लगे थे। बाद में कर्नल की शिकायत के आधार पर हरीश चंद्र, उनकी पत्नी और बेटे समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

लीजबैक मामले में कार्रवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन नायब तहसीलदार मनोज कुमार को कार्यमुक्त किया गया था। वहीं, तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (लैंड) अजय श्रीवास्तव और तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। अब शासन ने हरीश चंद्र की सेवा समाप्त कर इस मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है।

--आईएएनएस

पीकेटी/एएसएच