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370 हटाने के लिए 1952 से संघर्ष कर रही थी भाजपा : निशिकांत दुबे

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी ने दशकों तक "एक झंडा, एक निशान और एक संविधान" के सिद्धांत के लिए वैचारिक संघर्ष किया।
 

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी ने दशकों तक "एक झंडा, एक निशान और एक संविधान" के सिद्धांत के लिए वैचारिक संघर्ष किया।

निशिकांत दुबे ने कहा कि वर्ष 1952 से जनसंघ और उसके बाद भाजपा ने पूरे देश में एक समान संविधान और व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि इस विचार को साकार करने के लिए पार्टी ने 2019 तक इंतजार किया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को हटाया गया, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग बना।

उन्होंने कहा कि अगर किसी बात पर चर्चा, बहस या विरोध करने की ज़रूरत है, तो वह 5 अगस्त से 9 अगस्त के बीच हुई घटनाओं से जुड़ी है। सवाल यह उठना चाहिए कि 1953 में शेख अब्दुल्ला को जेल क्यों भेजा गया, कांग्रेस ने उनके भरोसेमंद साथी गुलाम बख्शी को उनके खिलाफ कैसे किया, और जम्मू-कश्मीर के लोगों ने शेख अब्दुल्ला के साथ मिलकर सालों तक कैसे संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दोहरी नीति के लिए उसकी आलोचना होनी चाहिए। एक तरफ तो उसने शेख अब्दुल्ला का समर्थन किया और अनुच्छेद 370 को बनाए रखा, जबकि दूसरी तरफ उसने ऐसे हालात पैदा किए जिनकी वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा। उस इलाके के तथाकथित संविधान के बारे में, जिसे कांग्रेस के शासनकाल में बनाया गया था, यह बात जगजाहिर है कि शेख अब्दुल्ला उसे बनाने वाली समिति के सदस्य नहीं थे और उन्होंने उस पर हस्ताक्षर भी नहीं किए थे। असल में, वे खुद अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया से पीएम मोदी का वीडियो हटने के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा, "परसों हुई संसदीय समिति की बैठक के बाद, समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी इंटरमीडियरी का काम नहीं, बल्कि पब्लिशर का काम था। इसलिए, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर माफी मांगनी चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो मेटा को मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस ले ली जाएगी।"

निशिकांत दुबे ने कहा, "कल गृह सचिव ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 'सेफ हार्बर' सुरक्षा देने के बावजूद, हम बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, महिलाओं के खिलाफ अपराध और एआई से बने फेक वीडियो जैसे मुद्दों पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि ये प्लेटफॉर्म सीएसएएम कंटेंट को भी नहीं हटा रहे हैं और वह अभी भी उपलब्ध है। यूजर्स को लुभाने के लिए विज्ञापनों के जरिए पोर्नोग्राफिक और यौन कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है और ऐसे कंटेंट के जरिए मेंबरशिप बनाई जाती है।"

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस