250 दिनों से समुद्र में यूएसएस अब्राहम लिंकन, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पूछे सवाल
वाशिंगटन/तेहरान, 13 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी नौसेना की लंबी तैनाती को लेकर घरेलू स्तर पर सवाल पूछे जाने लगे हैं। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ से यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) में तैनात नौसैनिकों की खराब परिस्थितियों, आपूर्ति की कमी, प्लंबिंग समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर रक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने तीन पन्नों की चिट्ठी साझा करते हुए पूछा कि विभाग बताए कि सैनिक को लेकर फिक्र जाहिर की। विमानवाहक पोत 250 दिनों से अधिक समय से समुद्र में है।
ब्लूमेंथल ने कहा, " पोत पर आपूर्ति की कमी, प्लंबिंग संबंधी समस्याओं और सैनिकों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य की रिपोर्ट गंभीर चिंता का विषय है। यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को जनवरी के अंत में अमेरिकी नौसैनिक जमावड़े के दौरान दक्षिण चीन सागर में चल रहे अभ्यास से हटाकर मध्य पूर्व की ओर भेजा गया था।"
उन्होंने यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (सीवीएन-78) का भी जिक्र किया। बताया कि कैसे उस पोत ने मुश्किलों के बीच समुद्र में 326 दिन बिताए थे। नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पोत की समुद्र में तैनाती छह महीने से ज्यादा नहीं रहती है और ये वियतनाम युद्ध के बाद सबसे लंबी तैनाती रही है।
इसके साथ ही उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की तैनाती का असर सैनिकों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ सकता है। उन्हें थकान हो सकती है। सीनेटर ने तैनाती, तैयारी और सेहत को लेकर कुल 6 सवाल पूछे हैं। जिसमें युद्ध पोत कितनी अवधि तक रुकेगा, नौसैनिकों के लिए क्या इंतजामात हैं, आगामी ऑपरेशन्स को लेकर नेवी की क्या तैयारी है, विभाग की स्ट्रैटजी संबंधी जवाब मांगा गया है।
ईरान संघर्ष के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दावों की जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि अमेरिका का होर्मुज पर “पूर्ण नियंत्रण” है, जबकि तेहरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज करते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
अल जजीरा की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इससे ट्रंप के नियंत्रण संबंधी दावे और जलमार्ग की जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के खिलाफ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा और जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्ट्रेट को बंद रखने के अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।
--आईएएनएस
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