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सेना के जवान का निधन, मुंगेर में पांच साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

मुंगेर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। मुंगेर के वासुदेवपुर निवासी सेना के हवलदार संजीव कुमार के अंतिम संस्कार में पूरा गांव नम आंखों से शामिल हुआ। आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में कार्यरत 41 वर्षीय हवलदार संजीव कुमार का लखनऊ के कमान अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। निधन की खबर मिलते ही सेना के जवान पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर एंबुलेंस से मुंगेर पहुंचे।
 

मुंगेर, 10 अगस्त (आईएएनएस)। मुंगेर के वासुदेवपुर निवासी सेना के हवलदार संजीव कुमार के अंतिम संस्कार में पूरा गांव नम आंखों से शामिल हुआ। आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में कार्यरत 41 वर्षीय हवलदार संजीव कुमार का लखनऊ के कमान अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। निधन की खबर मिलते ही सेना के जवान पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर एंबुलेंस से मुंगेर पहुंचे।

जिस बेटे का हाथ पिता को पकड़कर चलना चाहिए था, उसी पांच वर्षीय मासूम ने सोमवार को पिता को मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर सेना की परंपरा के अनुसार हवलदार संजीव कुमार को सैन्य सलामी दी गई। गया से पहुंची सैन्य यूनिट के जवानों ने बंदूक से हवाई फायर कर शहीद को अंतिम सम्मान दिया। इस दौरान सुबेदार किशोर कुमार, नायक सुभाष कुमार निराला, नायक सुबेदार रंजीत सिंह, और सुबेदार दीपक चौधरी सहित कई जवान मौजूद थे।

सैन्य सम्मान के बाद उनके पांच वर्षीय बेटे योगेश राज ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे को तिरंगे में लिपटे ताबूत के पास खड़ा देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। लोगों ने 'शहीद संजीव कुमार अमर रहें' के नारे लगाए और सैन्य सम्मान के बीच हवलदार संजीव पंचतत्व में विलीन हो गए।

हवलदार संजीव कुमार की सेना में भर्ती वर्ष 2004 में हुई थी। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक देश की सेवा की। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग ओडिशा के गोपालपुर में थी। वे आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में तैनात थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के कमान अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

संजीव कुमार अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा योगेश राज पांच साल का है और छोटा बेटा करीब तीन साल का। पिता के अंतिम संस्कार में पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। पार्थिव शरीर को देखकर वह बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। परिजन और गांव वाले उन्हें संभालते रहे।

परिवार के करुण क्रंदन और दोनों मासूम बच्चों को देखकर श्मशान घाट का माहौल बेहद भावुक हो गया। लोगों का कहना था कि जिस उम्र में बच्चे पिता का हाथ पकड़कर स्कूल जाते हैं, उस उम्र में योगेश को पिता को अंतिम विदाई देनी पड़ी। उनके निधन की खबर मिलते ही वासुदेवपुर और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और सेना के जवान शामिल हुए।

सेना के जवान सुभाष कुमार ने कहा, "संजीव एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक थे। देश ने एक बहादुर सपूत खो दिया है।" गांववालों ने सरकार से शहीद के परिवार को हरसंभव मदद देने की मांग की है।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम