21 सितंबर का पंचांग: अमृतकाल में करें कोई भी शुभ काम, सुबह 10:49 से 12:20 बजे तक कोई भी काम करने से बचें
नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
21 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 8:01 बजे तक है। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। सोमवार सुबह 6:19 बजे सूर्योदय और शाम 6:20 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 3:04 चंद्रोदय और रात 2:01 बजे चंद्रास्त होगा।
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है। सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से लेकर कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा (देवताओं और पितरों के प्रमुख) हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं।
सोमवार दोपहर 16:04 बजे तक शोभन योग रहेगा। इसको एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक नित्य योग माना गया है। सौ योगों में से इसको पांचवां योग माना गया है। जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों की योग दूरी 53 अंश 20 कला से 66 अंश 40 कला के बीच होती है, तब यह योग बनता है। इस योग के स्वामी देवता या कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति हैं, जिनको ज्ञान, वृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। शोभन योग में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य, मांगलिक अनुष्ठान या नई यात्रा की शुरुआत करना बेहद उत्तम माना जाता है।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 से दोपहर 12:44 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
सोमवार को अमृतकाल रात 12:01 से रात 1:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं उन्हें जारी रखा जा सकता है।
सोमवार को गुलिक काल दोपहर 1:50 से 3:20 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है।
इस दिन यमगंड काल सुबह 10:49 से 12:20 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए।
सोमवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेगा। जब चंद्रमा मकर राशि में रहता है तो लोगों की भावनाओं पर मकर राशि के स्वामी शनि का प्रभाव होता है। इससे व्यक्ति का स्वभाव काफी व्यवहारिक और अनुशासित हो जाता है।
सोमवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
--आईएएनएस
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