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अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस : शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल पहुंच में बढ़ती खाई को भरने पर फोकस

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक और सुविधाएं भी बढ़ रही हैं लेकिन इसके साथ एक बड़ी चिंता भी सामने आ रही है। अमीर और गरीब के बीच की दूरी लगातार बढ़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर परिवारों और बच्चों पर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस का विषय रखा गया है "परिवार, असमानताएं और बाल कल्याण"। यह विषय इस बात पर जोर देता है कि असमानताएं सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं हैं बल्कि ये बच्चों के भविष्य और परिवारों की खुशहाली को भी प्रभावित करती हैं।
 
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस : शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल पहुंच में बढ़ती खाई को भरने पर फोकस

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक और सुविधाएं भी बढ़ रही हैं लेकिन इसके साथ एक बड़ी चिंता भी सामने आ रही है। अमीर और गरीब के बीच की दूरी लगातार बढ़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर परिवारों और बच्चों पर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस का विषय रखा गया है "परिवार, असमानताएं और बाल कल्याण"। यह विषय इस बात पर जोर देता है कि असमानताएं सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं हैं बल्कि ये बच्चों के भविष्य और परिवारों की खुशहाली को भी प्रभावित करती हैं।

आज दुनिया के कई परिवार आय की असुरक्षा, बच्चों की देखभाल की कमी और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। खासकर छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए हालात और मुश्किल हो जाते हैं। जब परिवार को पर्याप्त सहायता नहीं मिलती, तो गरीबी का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक विकास पर पड़ता है। अगर किसी बच्चे को शुरुआत से सही पोषण, अच्छी शिक्षा और सुरक्षित माहौल नहीं मिलता, तो उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि असमानता केवल पैसों तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं और अवसरों की पहुंच में भी दिखाई देती है। कई बार लिंग, नस्ल, प्रवासी स्थिति या विकलांगता जैसी वजहें भी बच्चों और परिवारों के लिए मुश्किलें बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि इस साल का आयोजन परिवार-केंद्रित नीतियों पर ज्यादा निवेश की मांग करता है।

इस आयोजन में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि सरकारें ऐसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करें, जिनसे परिवारों को सीधा लाभ मिले। इनमें बच्चों के लिए आर्थिक सहायता, माता-पिता को छुट्टी की सुविधा, किफायती चाइल्ड केयर और शुरुआती शिक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं। माना जाता है कि अगर परिवार मजबूत होंगे, तो बच्चों को बेहतर अवसर मिलेंगे और समाज भी ज्यादा संतुलित बनेगा।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की शुरुआत की कहानी भी काफी महत्वपूर्ण है। 1980 के दशक में संयुक्त राष्ट्र ने परिवारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया। 1983 में सामाजिक विकास आयोग ने विकास प्रक्रिया में परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए जागरूकता बढ़ाने की बात कही। इसके बाद कई बैठकों और प्रस्तावों के जरिए परिवारों के कल्याण को वैश्विक चर्चा का हिस्सा बनाया गया।

आखिरकार 9 दिसंबर 1989 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'परिवार के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' की घोषणा की। फिर 1993 में यह तय किया गया कि हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य परिवारों से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में परिवारों की अहम भूमिका को पहचान दिलाना है।

साल 2015 में संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों ने मिलकर सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया। इन 17 लक्ष्यों का मकसद गरीबी खत्म करना, भेदभाव रोकना और सभी लोगों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने में परिवारों की भूमिका बेहद अहम मानी गई है।

आज जरूरत इस बात की है कि परिवारों को समाज और विकास की नीतियों के केंद्र में रखा जाए क्योंकि मजबूत परिवार ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी नींव होते हैं।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम