उज्जैन के 170 साल पुराने हनुमान मंदिर को बचाने आगे आईं साध्वी हर्षानंद गिरी, प्रशासन से की अपील
उज्जैन, 10 सितंबर (आईएएनएस)। उज्जैन में सती गेट के पास स्थित 170 साल पुराना खड़ा हनुमान मंदिर इस समय हिंदुओं का गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरी संत समाज और सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ भगवान हनुमानजी के दर्शन करने पहुंचीं। विकास कार्यों एवं सड़क चौड़ीकरण की जद में आए इस प्राचीन मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए संत समाज पूरी तरह एकजुट हो गया है। इस दौरान साध्वी हर्षानंद गिरी ने मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की और स्थानीय भक्तों से मुलाकात की।
साध्वी हर्षानंद ने मीडिया से बातचतीत में यह स्पष्ट किया कि इस मंदिर की हर हाल में रक्षा की जाएगी और प्रशासनिक अधिकारियों को आस्था का सम्मान करते हुए बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा, "बाबा तो बिना मांगे ही बहुत कुछ दे देते हैं और हम तो उनसे यही कहेंगे कि वे हमें इतनी हिम्मत दें कि हम उनके लिए आवाज उठा सकें। क्योंकि हम मनुष्य मर्यादाओं में बंधकर कभी आवाजा नहीं उठा पाते हैं, तो वो आवाज न दबे। हम इतने सामर्थ्यवान हो जाएं कि उनके लिए आवाज उठा पाएं।
उन्होंने आने वाले दिनों में कुंभ को लेकर कहा, "कुंभ को लेकर सरकार जितने भी कार्य कर रही है, उन सभी में हम सरकार के साथ हैं। हम उनके कार्यों में किसी भी प्रकार का विघ्न उत्पन्न नहीं करने देंगे लेकिन इसके साथ ही मंदिर को हटाने के लिए चार प्रयास हो चुके हैं। अब हम चाहते हैं कि और प्रयास न हो और पूरे शहर को चौढ़ा करवाया जाए, व्यवस्थाएं हो लेकिन इस मंदिर को छोड़ दिया जाए। इसको ठीक करके अच्छा सा निर्माण कार्य करवाया जाए।"
शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी साधु ने कहा, "आपने देखा होगा कि नील गंगा से लोटी स्कूल वाले क्षेत्र में चिमनी आ रही थी। उस चिमनी को नहीं हटाया बल्कि उसके आसपास से सड़क को निकाला गया था। वहां, हनुमान महाराज का भी मंदिर है, जिसे इधर उधर रोड निकाली गई थी और बाबा मध्य में विराजमान है। जब वहां चिमनी के लिए रोड़ निकल सकता है, तो मेरा प्रशासन से निवेदन है कि यहां पर भी कुछ विकल्प निकाले और बाबा को मत हटाएं क्योंकि यह बहुत पीढ़ा का विषय है।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर प्रशासन एक मंदिर को छोड़ देगा, तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा। प्रशासनिक तौर से बताया गया कि मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई, तो मंदिर हवा में टूट गया है। संत समाज को एक होना पड़ेगा, हिंदुओं को एक होना पड़ेगा। अगर आज नहीं होंगे एक तो कल बंट जाओगे।"
--आईएएनएस
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