15 साल से जनता की जेब काट रही सरकार, अब यूपीआई पर शुल्क की तैयारी: हन्नान मोल्लाह
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। सीपीआई-एम नेता हन्नान मोल्लाह ने यूपीआई-रुपे पेमेंट पर प्रस्तावित चार्ज, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, एनआरसी को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान और न्यायिक पारदर्शिता के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम लोगों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है। वहीं, एनआरसी के मुद्दे पर उन्होंने अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को लेकर चिंता जताई।
यूपीआई-रुपे पेमेंट चार्ज और 2 हजार रुपए से अधिक के लेनदेन के लिए प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर को लेकर हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में आम लोगों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ा है और अब यह नया शुल्क भी उसी दिशा में एक और कदम होगा। आम जनता को लगातार सावधान रहना पड़ रहा है कि उसकी जेब कब कट जाए।
उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में लोगों की जेब पर इतना बोझ डाला गया है कि अब स्थिति छलनी जैसी हो गई है और इसमें लगातार नए छेद किए जा रहे हैं। जब तक ऐसी नीतियों के लिए जिम्मेदार लोगों को सत्ता से हटाया नहीं जाएगा, तब तक आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता रहेगा और उसे राहत नहीं मिलेगी।
सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा कार्रवाई किए जाने के सवाल पर भी हन्नान मोल्लाह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकारी कदमों का वास्तविक असर सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि इससे नुकसान कम होगा या फायदा। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से परिस्थितियों में क्या बदलाव आता है, यह देखना होगा। इसके बाद ही जनता यह तय कर सकेगी कि सरकार का फैसला सही है या गलत।
एनआरसी को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि इससे प्रभावित होने वाले लोगों के लिए असुविधा और चिंता स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को लंबे समय से विभिन्न तरीकों से परेशान किया जा रहा है और एनआरसी भी उसी तरह की एक नीति हो सकती है। यदि किसी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही स्थिति या अधिकारों में अचानक बदलाव किया जाता है, तो इससे प्रभावित लोगों के सामने असुविधा पैदा होगी। मुसलमानों को लेकर एक विशेष सोच लंबे समय से बनाई गई है और उन्हें परेशान करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक ऐसी सोच और नीतियां बनी रहेंगी, तब तक नए-नए हमले होते रहेंगे। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है।
न्यायिक पारदर्शिता को लेकर सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी को हन्नान मोल्लाह ने सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही का होना बेहद जरूरी है और ऐसी व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल बयान देने से बात पूरी नहीं होती, बल्कि ऐसी बातों को व्यवहार में भी लागू किया जाना चाहिए। न्यायपालिका के लिए यह अच्छी बात होगी कि पारदर्शिता से जुड़े सिद्धांतों को ईमानदारी से लागू किया जाए। न्यायिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए कही गई बातों को व्यवहार में उतारना जरूरी है।
--आईएएनएस
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