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14 अगस्त का पंचांग: शाम 6:46 बजे से हरियाली तीज का शुभारंभ, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
 

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि शाम 6:47 बजे तक है। इसके बाद तृतीया लग जाएगी। इस दिन शाम 6:46 बजे से हरियाली तीज प्रारंभ हो जाएगी, जो अगले दिन 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा।

शुक्रवार को सुबह 6:06 बजे सूर्योदय और शाम 6:56 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 7:26 बजे चंद्रोदय और शाम 8:09 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह (तड़के) 03:42 से 04:38 बजे तक मघा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

शुक्रवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि सुबह 9:27 से 9:31 बजे तक परिघ योग और उसके बाद शिव योग रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल रात 9:56 से 11:28 बजे तक रहेगा।

वहीं, राहुकाल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:31 बजे और गुलिक काल सुबह 7:42 से 9:19 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल दोपहर 3:44 से शाम 5:20 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।

शुक्रवार को इस दिन सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा। पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी