11 सितंबर का पंचांग: भाद्र माह की अमावस्या पर तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों का मिलता है आशीर्वाद, पितृ दोष होता है दूर
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। इस दिन भाद्र माह की अमावस्या होने की वजह से पितरों का तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शुक्रवार सुबह 6:16 बजे सूर्योदय और शाम 6:31 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 6:09 बजे चंद्रोदय और शाम 6:39 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा, जबकि चंद्रमा दोपहर 1:16 बजे तक पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
शुक्रवार को शाम 5:02 बजे तक साध्य योग रहेगा। इसके बाद शुभ योग शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 7:03 से 08:36 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:23 बजे और गुलिक काल सुबह 7:47 से 9:19 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 3:27 से शाम 4:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
शुक्रवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि रात 7:08 मिनट तक सिंह राशि में रहेगा, इसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा। दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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