'जिंदगी में सब बदल गया था' मंजिमा मोहन ने 10 साल बाद शुरू की भरतनाट्यम प्रैक्टिस
मुंबई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री मंजिमा मोहन भारतीय सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शुमार हैं, जो अभिनय के साथ शास्त्रीय नृत्य कला में भी निपुण हैं। शनिवार को अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने फिर से भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया है।
अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह भरतनाट्यम करती नजर आ रही हैं। मंजिमा मोहन ने लिखा, "मेरी मां ने मुझे 6 साल की उम्र में भरतनाट्यम से मिलवाया था, वो खुद भी एक ट्रेंड डांसर हैं। मैंने 10 साल की उम्र के आसपास गुरुवायूर में अपना पहला अरंगेत्रम किया था और कॉलेज तक सीखना जारी रखा। और फिर किसी तरह जिंदगी में सब कुछ बदल गया और लगभग 10 साल तक मैंने प्रैक्टिस नहीं की।"
आगे उन्होंने लिखा, "बीच में मैंने सेमी-क्लासिकल डांस किया लेकिन भरतनाट्यम में वापस जाने से हमेशा हिचकिचाती रही क्योंकि मेरी प्रैक्टिस बिल्कुल छूट गई थी। तो ये बहुत लंबे समय बाद एक छोटी सी कोशिश है और मैं लगभग भूल ही गई थी कि मुझे ये करना कितना पसंद है। मुझे इस बात का अफसोस है कि मैंने इतने लंबे समय तक इतनी खूबसूरत कला को छोड़ दिया, लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि मैं फिर से इसमें वापस आ रही हूं। आगे और भी बहुत कुछ करना है।"
अभिनेत्री ने डांस के लिए अपनी गुरु को धन्यवाद भी दिया और लिखा, "इस खूबसूरत डांस को सिखाने और मुझे कोशिश करने के लिए प्रेरित करने के लिए मास्टर आपका धन्यवाद।"
बता दें कि मंजिमा मोहन मुख्य रूप से तमिल, मलयालम और तेलुगु फिल्मों में सक्रिय रहती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मलयालम फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में की थी। फिल्म 'मधुरानोमबारकट्टू' (2000) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिला।
उनका परिवार फिल्म जगत से जुड़ा हुआ है। वह प्रसिद्ध छायाकार विपिन मोहन और नर्तकी कलामंडलम गिरिजा की बेटी हैं। प्रसिद्ध निर्देशक गौतम मेनन की फिल्म अच्चम एनबधु मदामैयादा से उन्होंने तमिल सिनेमा में कदम रखा। इसी फिल्म के तेलुगु संस्करण साहसम स्वासगा सागीपो में भी उन्होंने अभिनय किया। इस दमदार डेब्यू के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड फॉर बेस्ट फीमेल डेब्यू - साउथ मिला।
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