1 नवंबर को राहुल गांधी की रैली के खिलाफ रामलीला मैदान में उतरेंगे 1984 दंगे के पीड़ित, अमित शाह को लिखेंगे पत्र
मुंबई, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की और कहा कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम की अनुमति न देने की मांग करेंगे।
एक पीड़ित ने कहा, "सबसे पहले तो मैं राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि वे समय-समय पर सिखों की भावनाओं से खेलना बंद करें। क्योंकि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं। जब 2014 के लोकसभा चुनाव थे, तब अलवर जिले के दौसा में कांग्रेस की रैली थी और उस समय वे कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे। मैं भी संयोगवश वहां गया हुआ था। मैंने टीवी चैनल पर देखा कि वे कह रहे थे, "जब मैं सरदारों को देखता हूं तो मुझे मेरी दादी याद आती है।"
उन्होंने आगे कहा कि मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि राहुल गांधी, जब हम आपको देखते हैं, आपके परिवार को देखते हैं, तो हमें अपने वे परिवार याद आते हैं, जिनके हजारों निर्दोष लोग मारे गए थे। हमें वे हजारों गुरुद्वारे याद आते हैं जिन्हें जलाया गया था। हमें वे माताएं और बहनें याद आती हैं जिनके साथ आपके गुंडों ने दरिंदगी की थी।
व्यक्ति ने कहा कि हम एक तारीख को इसका विरोध करने के लिए रामलीला मैदान में जाएंगे। हजारों विधवाएं वहां पहुंचेंगी। जो होगा, देखा जाएगा। आखिर हम 42 साल से कितना सहन करते आए हैं? आपने सिखों के कथित हत्यारों को टिकट दिए, उन्हें मंत्री बनाया। क्या आपको शर्म नहीं आई? आपने टाइटलर को टिकट दिया, सज्जन कुमार को टिकट दिया, कमलनाथ को आगे बढ़ाया, यहां तक कि मुख्यमंत्री बनाया। क्या आपको जरा भी शर्म नहीं आई? न आपको शर्म आती है, न आपके परिवार को, और न ही आपकी पार्टी को। इसलिए राहुल गांधी, सिखों के साथ खेलना बंद करो। हमारे जख्मों पर नमक छिड़कना बंद करो।
उन्होंने कहा कि जब हमारे लोगों को मारा गया, तो उनकी जान की कीमत मात्र दस हजार रुपए लगाई गई। जिनका लाखों-करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ, उन्हें कुछ सौ या हजार रुपए का मुआवजा दिया गया। यह हमारे साथ भद्दा मजाक था। मैं पूछता हूं, आज आप करोड़ों रुपए की मांग करते हो। किसी आंदोलन में कोई घायल हो जाए तो पचास लाख रुपए की मांग करते हो, किसी की मृत्यु हो जाए तो एक करोड़ रुपए की मांग करते हो। उस समय आपको ये बातें याद नहीं थीं?
उन्होंने कहा कि मतलब अपने लिए सब कुछ सही है और हमारे लिए कुछ भी नहीं? फिर आप सिखों के बीच जाकर वोट कैसे मांगते हो? आपको शर्म आनी चाहिए, खासकर आपकी माता सोनिया गांधी को और प्रियंका गांधी को भी शर्म आनी चाहिए। देश के 17 राज्यों में हिंसा हुई थी। कानपुर, बोकारो, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और अन्य राज्यों में घटनाएं हुईं। हजारों लोगों की हत्या हुई और लाखों लोगों की संपत्ति लूटी गई।
उन्होंने कहा कि केवल दिल्ली में ही हजारों लोग घायल हुए थे, लेकिन उनकी ठीक से रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई। हजारों लोग मारे गए, लेकिन उनके नाम तक दर्ज नहीं किए गए। क्या हमारे जख्मों से खेलना बंद नहीं होना चाहिए? उनका एक ही उद्देश्य है। जिस प्रकार उनके पिता राजीव गांधी ने भारी बहुमत प्राप्त किया था, उसी तरह वे भी राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होगा।
सिख विरोधी दंगे की एक पीड़िता ने कहा कि सिर्फ अपनी राजनीतिक सीटों के लिए कुछ भी करना उचित नहीं है। पहले इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हमारे परिवारों को नुकसान पहुंचा, और अब जब सिख समुदाय अपनी बात उठाता है तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। क्या सिर्फ राहुल गांधी की ही चलेगी? हम भी विरोध करेंगे। यदि हम उनकी रैली का बहिष्कार करना चाहते हैं तो करेंगे। हमारे सिखों को जिस प्रकार मारा गया, उस दर्द को हम भूल नहीं सकते। हम राहुल गांधी से कहना चाहते हैं कि समझदारी से काम लें, यही उनके हित में है।
महिला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शायद इससे खुश हो, लेकिन जिन लोगों ने अपने परिवार खोए हैं, उनके लिए यह खुशी का विषय नहीं है। जब इंदिरा गांधी की मृत्यु हुई थी, तब उसके बाद जो कुछ हुआ, उसे लोग भूले नहीं हैं। आज भी अनेक विधवाएं और पीड़ित परिवार उस दर्द को याद करते हैं। हम साफ कहते हैं कि यदि कांग्रेस रैली निकालेगी, तो विरोध भी होगा। हम पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हम राहुल गांधी से कहना चाहते हैं कि संयम और समझदारी से काम लें। यही उनके लिए उचित होगा। हम चुप बैठने वालों में नहीं हैं।
--आईएएनएस
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