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दांतों का पीलापन : बेकिंग सोडा से नींबू तक, जानिए किसका है फायदा और किससे हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। सफेद और चमकदार दांत हर किसी को अच्छे लगते हैं। हंसते समय साफ दांत चेहरे की खूबसूरती बढ़ाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। यही वजह है कि आजकल सोशल मीडिया पर दांतों को जल्दी सफेद करने के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। कोई बेकिंग सोडा से दांत साफ करने की सलाह देता है, तो कोई नींबू, हल्दी या सिरके का इस्तेमाल करने की बात करता है। कई वीडियो में तो यह तक दावा किया जाता है कि कुछ ही मिनटों में दांतों का पीलापन दूर किया जा सकता है।
 

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। सफेद और चमकदार दांत हर किसी को अच्छे लगते हैं। हंसते समय साफ दांत चेहरे की खूबसूरती बढ़ाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। यही वजह है कि आजकल सोशल मीडिया पर दांतों को जल्दी सफेद करने के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। कोई बेकिंग सोडा से दांत साफ करने की सलाह देता है, तो कोई नींबू, हल्दी या सिरके का इस्तेमाल करने की बात करता है। कई वीडियो में तो यह तक दावा किया जाता है कि कुछ ही मिनटों में दांतों का पीलापन दूर किया जा सकता है।

लेकिन दांतों का रंग बदलना इतना आसान नहीं होता। कुछ घरेलू चीजें दांतों के ऊपर जमा हल्के दाग को थोड़ी देर के लिए कम कर सकती हैं, लेकिन इससे दांत अंदर से सफेद नहीं होते। इसलिए दांतों को सफेद करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनका रंग क्यों बदलता है और अलग-अलग घरेलू चीजें दांतों पर क्या असर डालती हैं।

दांतों के पीले दिखने की सबसे आम वजह खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं। चाय, कॉफी, तंबाकू और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में मौजूद वर्णक दांतों की इनेमल सतह पर चिपक जाते हैं। नियमित रूप से मुंह और दांतों की उचित स्वच्छता न अपनाने पर यह वर्णक स्थायी रूप से पीले या भूरे दागों में बदल जाते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ भी दांतों का रंग बदलना सामान्य है। दांतों के बाहर एक मजबूत परत होती है, जिसे इनेमल कहते हैं। समय के साथ यह परत थोड़ी पतली हो जाती है। इसके नीचे डेंटिन नाम की परत होती है, जिसका रंग प्राकृतिक रूप से हल्का पीला होता है। इनेमल पतला होने पर डेंटिन ज्यादा दिखाई देता है और दांत पीले लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से दाग साफ करने से दांत पूरी तरह सफेद नहीं होते।

बात करें अगर बेकिंग सोडा की, तो बेकिंग सोडा दांतों को साफ करने वाले कई टूथपेस्ट में भी इस्तेमाल होता है। यह दांतों की सतह पर मौजूद कुछ दागों को हल्के तरीके से हटाने में मदद करता है, लेकिन दांत का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता। कई लोग बेकिंग सोडा लेकर उसे बार-बार और जोर से दांतों पर रगड़ने लगते है। ज्यादा रगड़ने से दांतों की बाहरी परत घिस सकती है। इससे दांतों में ठंडा-गरम लगने की परेशानी यानी संवेदनशीलता बढ़ जाती है। इसलिए बेकिंग सोडा को दांत सफेद करने का चमत्कारी घरेलू उपाय समझना सही नहीं है।

वहीं नींबू और सिरका दांतों के लिए नुकसानदायक हो सकते है। नींबू और सिरका खट्टे होते हैं। इनमें मौजूद एसिड दांतों की बाहरी परत को धीरे-धीरे कमजोर करता है। अगर कोई व्यक्ति इन्हें बार-बार दांतों पर लगाता है या इनसे दांत रगड़ता है, तो इनेमल को नुकसान पहुंच सकता है। इनेमल खराब होने के बाद वह पहले जैसा वापस नहीं बन पाता। इसके कमजोर होने पर दांतों में झनझनाहट की परेशानी हो सकती है। साथ ही नीचे मौजूद पीली परत ज्यादा दिखाई देने लगती है। दांत सफेद करने के चक्कर में उल्टा उनका पीलापन ज्यादा नजर आ सकता है।

दांतों को सफेद रखने के लिए कई वैज्ञानिक तरीके मौजूद है। दांतों को सफेद करने वाले कई वैज्ञानिक प्रोडक्ट्स में पेरोक्साइड नाम का पदार्थ इस्तेमाल होता है। यह दांतों में मौजूद उन कणों पर असर करता है, जिनकी वजह से दांत पीले दिखाई देते हैं। यह इन कणों को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करता है।

बाजार में मिलने वाले सही तरीके से बने व्हाइटनिंग स्ट्रिप्स और जैल धीरे-धीरे असर दिखा सकते हैं। वहीं, डेंटिस्ट की देखरेख में होने वाली व्हाइटनिंग आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित और बेहतर तरीके से की जाती है।

--आईएएनएस

पीके/एएस