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Nagaur का किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की ओर बढ़ रहा है

 
Nagaur का किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की ओर बढ़ रहा है
नागौर न्यूज़ डेस्क, नागौर व डीडवाना- कुचामन जिले में समय के साथ भूजल स्तर में आई गिरावट व सरकार की ओर से आधुनिक खेती को बढ़ावा देने का परिणाम नजर आने लगा है। जिले में पिछले कुछ वर्षों से किसान परम्परागत खेती को छोड़कर बागवानी/उद्यानिकी खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उद्यानिकी में किसानों को अच्छी आमदनी के साथ रिस्क भी कम है। जिले में फल, सब्जी, मसाला, औषधीय फसलों की विपुल संभावनाएं हैं। उद्यानिकी विभाग की ओर से उद्यानिकी फसलों के साथ वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने एवं फसल क्षेत्र उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता सुधार के लिए भारत सरकार व राज्य सरकार की ओर से विभिन्न अनुदानित योजनाएं संचालित हैं। किसानों की ओर से अब तक 400 पॉली हाउस लगाकर खेती की जा रही है। साथ ही 2.53 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई संयंत्रों से सिंचाई की जा रही है। गत दो साल में उद्यान विभाग से अनुदान प्राप्त करने के लिए कृषकों के आवेदनों की संख्या में बढोतरी हुई है। इस साल जिले में सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र स्थापना के लक्ष्य 4,674 हैक्टेयर मिले थे, जिनको शत-प्रतिशत पूर्ण करने के बाद लम्बित आवेदनों की संख्या अधिक होने पर उद्यान विभाग की ओर से 4 हजार हैक्टेयर लक्ष्यों की मांग और की गई है।

50 से 95 प्रतिशत तक मिलता है अनुदान

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत जिले में अब तक सामुदायिक जल स्त्रोत, फलदार बगीचा स्थापना, वर्मी कम्पोस्ट, प्याज भण्डारण संरचना, पॉली हाउस, शेडनेट हाउस, प्लास्टिक मल्च, लॉ-टनल पर विभाग की ओर से 50 से 95 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। साथ ही ड्रीप संयंत्र, फव्वारा संयंत्र स्थापना पर विभाग की ओर से 70 से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

नागौर. छापरी खुर्द में किसानों ने तैयार किया सामूहिक जल स्रोत।

नागौर. जिले के कुराड़ा में पॉली हाउस में किसान ने लगाई खीरे की फसल।

एससी-एसटी वर्ग के किसानों में कम रुझान

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उद्यानिकी विभाग की योजनाओं में सामान्य किसान तो रुचि दिखा रहे हैं, लेकिन एससी-एसटी वर्ग के किसानों की रुचि अपेक्षाकृत कम है। हालांकि इसके लिए प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है, फिर भी इसमें सुधार की आवश्यकता है। लघु एवं सीमांत किसानों को अनुदान भी अधिक दिया जाता है। जिले के किसानों में उद्यानिकी के प्रति अच्छा रुझान है। उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं में जिले को आंवटित लक्ष्यों की पूर्ति कर ली गई है। केवल अनुसूचित जाति के कृषकों के आवेदन अनुदान प्राप्ति के लिए कम आ रहे हैं। इसके लिए प्रचार-प्रसार अधिकारियों व कार्मिकों की ओर से किया जा रहा है। अनुसूचित जाति के कृषकों के आवेदन प्राप्त होते ही तुरन्त स्वीकृति जारी की जा रही है। अनुदान भुगतान के लिए बजट की कोई कमी नहीं है।