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नागौर मंडी में मसाला फसलों में तेजी, जीरा स्थिर; सौंफ-इसबगोल में जोरदार उछाल, मूंग 1200 रुपए तक लुढ़का

 
नागौर मंडी में मसाला फसलों में तेजी, जीरा स्थिर; सौंफ-इसबगोल में जोरदार उछाल, मूंग 1200 रुपए तक लुढ़का

नागौर कृषि उपज मंडी में बुधवार को विभिन्न कृषि जिंसों के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मसाला फसलों में तेजी का रुख रहा। खास तौर पर सौंफ और इसबगोल के भाव में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। वहीं जीरे के भाव में खास बदलाव नहीं हुआ और यह लगभग स्थिर रहा। दूसरी ओर मूंग के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली और इसके दाम 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक नीचे आ गए।

मंडी में किसानों और व्यापारियों की नजर दिनभर जिंसों के भाव में होने वाले बदलाव पर रही। आवक और मांग के अनुसार अलग-अलग कृषि उपज के भाव में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

सौंफ और इसबगोल में जोरदार तेजी

नागौर मंडी में मसाला फसलों की मांग मजबूत रहने से सौंफ और इसबगोल के भाव में तेजी देखने को मिली। इन दोनों जिंसों में अन्य कृषि उपज की तुलना में अधिक उछाल दर्ज किया गया।

व्यापारियों के अनुसार, मांग में सुधार और बाजार में उपलब्धता के हिसाब से भाव में तेजी का असर दिखाई दिया। किसानों को सौंफ और इसबगोल की अच्छी कीमत मिलने से राहत मिली है।

जीरा के भाव रहे स्थिर

मंडी में जीरे के भाव में बुधवार को कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। जीरा लगभग स्थिर भाव पर कारोबार करता रहा।

जीरे की कीमतों में स्थिरता के पीछे आवक और मांग के बीच संतुलन को प्रमुख वजह माना जा रहा है। व्यापारियों की नजर आने वाले दिनों में मांग और नई आवक पर बनी हुई है।

मूंग में 1200 रुपए तक की गिरावट

जहां मसाला फसलों में तेजी रही, वहीं दलहन में मूंग के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मूंग के दाम 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए।

मूंग के भाव में अचानक आई गिरावट से किसानों को नुकसान की चिंता बढ़ी है। मंडी में आवक और बाजार की मांग के आधार पर इसके भाव में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

किसानों की बाजार पर नजर

नागौर मंडी में कृषि जिंसों के भाव में अलग-अलग रुख रहने से किसानों को अपनी उपज बेचने से पहले बाजार भाव पर नजर रखनी पड़ रही है। मसाला फसलों में तेजी से जहां सौंफ और इसबगोल उत्पादकों को फायदा हुआ, वहीं मूंग में गिरावट ने चिंता बढ़ाई है।

व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में आवक, मांग और बाहरी बाजार की स्थिति के आधार पर जिंसों के भाव में बदलाव हो सकता है। किसानों के लिए मंडी में अपनी उपज का सही भाव जानकर ही बिक्री का निर्णय लेना बेहतर रहेगा।