गोपालक ऋण योजना पर सवाल, 5 लाख के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 34 हजार को ही मिला लाभ
सरकार द्वारा गोपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई योजना का प्रदर्शन अब सवालों के घेरे में आ गया है। योजना के तहत 5 लाख गोपालकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल करीब 34 हजार लोगों को ही ऋण उपलब्ध कराया जा सका है।
आंकड़ों के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य की तुलना में आवेदन भी बेहद कम आए। कुल लक्ष्य के मुकाबले मात्र लगभग 25 प्रतिशत आवेदन ही प्राप्त हो सके, जो योजना के प्रति अपेक्षित रुचि न दिखने का संकेत माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, जो आवेदन प्राप्त हुए उनमें से भी केवल लगभग 33 प्रतिशत लोगों को ही ऋण स्वीकृत हो सका। इस स्थिति ने योजना की प्रगति और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के कम प्रभावी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जागरूकता की कमी, प्रक्रिया की जटिलता, दस्तावेजी औपचारिकताएं और बैंकिंग स्तर पर देरी प्रमुख हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव के कारण भी बड़ी संख्या में गोपालक आवेदन नहीं कर पाए।
किसान और पशुपालक संगठनों का कहना है कि यदि योजना को सरल और पारदर्शी बनाया जाए तो इसका लाभ अधिक लोगों तक पहुंच सकता है। साथ ही ऋण प्रक्रिया को आसान करने और जमीनी स्तर पर प्रचार-प्रसार बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
वहीं, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाना है और इसमें सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि आने वाले समय में आवेदन और स्वीकृति दोनों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
फिलहाल, लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा कर रहा है और इस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता बताई जा रही है।
