नागौरी अश्वगंधा को मिला GI टैग, मारवाड़ की औषधीय फसल को वैश्विक पहचान
मारवाड़ की तपती रेत और शुष्क जलवायु में उगने वाली एक विशिष्ट औषधीय फसल ने अब दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना ली है। केंद्र सरकार ने नागौर जिले की प्रसिद्ध औषधीय फसल ‘नागौरी अश्वगंधा’ को आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (GI टैग) प्रदान कर दिया है। यह उपलब्धि न केवल नागौर जिले बल्कि पूरे राजस्थान के किसानों और औषधीय खेती के क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
GI टैग मिलने के बाद अब नागौरी अश्वगंधा की गुणवत्ता, पहचान और विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। इसका अर्थ है कि अब केवल नागौर जिले के चिन्हित क्षेत्रों में उगाई गई अश्वगंधा को ही ‘नागौरी अश्वगंधा’ के नाम से जाना जाएगा। इससे नकली या निम्न गुणवत्ता वाली अश्वगंधा पर रोक लगेगी और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, नागौर की जलवायु, मिट्टी और तापमान नागौरी अश्वगंधा की औषधीय गुणवत्ता को अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है। यहां उगाई जाने वाली अश्वगंधा में एल्कलॉइड और औषधीय तत्वों की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिससे यह आयुर्वेदिक दवाओं में विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है। तनाव, अनिद्रा, कमजोरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई गंभीर बीमारियों के उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नागौर जिले में पिछले कुछ वर्षों से अश्वगंधा की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। GI टैग मिलने के बाद इसकी मांग देश-विदेश में और बढ़ने की संभावना है, जिससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
