नागौर की विश्व प्रसिद्ध पान मैथी को जीआई टैग मिलने की बढ़ी उम्मीदें, केंद्र सरकार ने दी अहम जानकारी
नागौर की विश्व प्रसिद्ध पान मैथी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने की उम्मीदें अब काफी तेज हो गई हैं। इस पारंपरिक और विशेष कृषि उत्पाद को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। मंगलवार को लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के दौरान सांसद ने नागौर की पान मैथी को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि पान मैथी को जीआई टैग प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्य किया जा रहा है।
गौरतलब है कि नागौर की पान मैथी अपनी खास खुशबू, स्वाद और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां की मिट्टी और जलवायु इस फसल के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिससे इसकी पैदावार अन्य क्षेत्रों की तुलना में अलग और बेहतर होती है। यही कारण है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इसकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। इससे नकली या अन्य क्षेत्रों की मैथी को नागौर की पान मैथी के नाम से बेचने पर रोक लगेगी। साथ ही स्थानीय किसानों को बेहतर कीमत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे। इससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय किसान लंबे समय से इस मांग को उठा रहे थे।
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि नागौर की पान मैथी जिले की पहचान है और इसे जीआई टैग दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों के बाद नागौर के किसानों और व्यापारियों में उत्साह का माहौल है। अब सभी को उम्मीद है कि जल्द ही पान मैथी को जीआई टैग मिल जाएगा, जिससे इस पारंपरिक फसल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
