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नागौर के 53 साल पुराने ‘कालू खान की बाड़ी’ विवाद में हाईकोर्ट का अहम फैसला, सनद को माना पूर्ण वैध

 
नागौर के 53 साल पुराने ‘कालू खान की बाड़ी’ विवाद में हाईकोर्ट का अहम फैसला, सनद को माना पूर्ण वैध

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नागौर शहर की चर्चित ‘कालू खान की बाड़ी’ से जुड़े 53 साल पुराने संपत्ति विवाद में अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने 15 जून 1972 को जारी की गई मूल सनद (अधिकार पत्र/पट्टा) को पूर्णतः वैध करार देते हुए लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लगा दिया है।

यह मामला कई दशकों से न्यायालयों में विचाराधीन था और इसमें संबंधित भूमि के स्वामित्व को लेकर विभिन्न पक्षों द्वारा अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। समय-समय पर इस विवाद को लेकर कई कानूनी प्रक्रियाएं चलीं, जिससे यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 1972 में जारी की गई मूल सनद कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य है और उसे चुनौती देने के लिए प्रस्तुत किए गए तर्क पर्याप्त आधार नहीं रखते। अदालत ने दस्तावेजों की वैधता और प्रामाणिकता को प्रमुख आधार मानते हुए यह निर्णय दिया।

इस फैसले के बाद संबंधित पक्षों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां एक पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है, वहीं दूसरे पक्ष के लिए यह बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय उन पुराने संपत्ति विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जिनमें वर्षों पुराने राजस्व दस्तावेजों और स्वामित्व को लेकर मतभेद बने रहते हैं। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि वैध सरकारी दस्तावेजों को केवल अनुमान या बाद के दावों के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

इस फैसले के साथ ही नागौर में ‘कालू खान की बाड़ी’ से जुड़े विवाद का एक लंबा अध्याय समाप्त माना जा रहा है, हालांकि आगे की औपचारिक कानूनी प्रक्रियाओं पर सभी की नजर बनी हुई है।