नागौर-इनाना: पंचायत चुनावों के बीच होली की खास कहानी, गाँव में उत्साह का रंग
जिले के मुण्डवा तहसील का ऐतिहासिक गाँव इनाना (Inana) में इस बार होली और पंचायत चुनावों का संगम एक अलग ही माहौल तैयार कर रहा है। पारंपरिक होली उत्सव और लोकतंत्र के मूल आधार पंचायत चुनाव दोनों के बीच लोगों ने उत्साह, राजनीति और स्थानीय संस्कृति को एक साथ जीने का नया तरीका अपनाया है।
इनाना, नागौर के मुख्यालय से लगभग 13 किमी पूर्व स्थित एक ग्रामीण समुदाय है, जहाँ अधिकांश लोग कृषि, पशुपालन और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े हैं। होली जैसे त्योहार यहाँ मात्र रंग-गुलाल का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-जोल और आपसी एकता का भी समय माना जाता है।
होली का खास रंग
प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर गाँव में पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ स्थानीय भजन-गीतों का आयोजन होता है, जो कई पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। यह रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि ग्रामीणों का सामूहिक उत्सव तथा आपसी प्रेम का प्रतीक रहता है। इनाना में होली का यह सामाजिक स्वरूप एकता और भाईचारे को मजबूती देने वाला माना जाता है।
होली के दिन गाँव के बुजुर्ग परिवारों के बीच परंपरागत भोज-भात होता है और युवा पहले से ही ढोल-कीर्तन-भजन के लिए गली-गली घूमना शुरू कर देते हैं। इन परंपराओं से होली केवल मस्ती का त्योहार नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति की पहचान और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बन चुकी है।
पंचायत चुनाव की सरगर्मी
इसी उत्सव के बीच इस बार गाँव में पंचायत चुनावों की तैयारी भी देखते ही बन रही है। चुनावी माहौल गाँव की चौपालों, चाय के ठेलों और बैठक जगहों पर गर्म चर्चा का विषय बना हुआ है। आगामी पंचायत चुनावों के लिए सार्वजनिक चर्चाएँ, उम्मीदवारों के प्रस्ताव और समर्थन जुटाने की कवायद सभी जगह सुनने को मिल रही हैं।
राजस्थान में राज्य सरकार के फैसले के तहत अब पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया और भी तेज़ हो गई है। इससे पहले भी पंचायत चुनाव को लेकर कानूनी दिक्कतें थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव की राह लगभग स्पष्ट हो चुकी है, जिससे ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक गतिविधियाँ सक्रिय हुई हैं।
गाँव में कुछ स्थानीय दावेदारों ने विकास कार्यों के बड़े वादों के साथ अपने अभियान शुरू कर दिए हैं, जिससे युवा, बुजुर्ग और महिला मतदाता वर्ग भी उत्साह से भाग ले रहे हैं। होली के उत्सव में रंग-गुलाल के साथ राजनीतिक चर्चाएँ गाँव को बिल्कुल अलग सामाजिक-राजनीतिक उत्साह से भरा हुआ दिखा रही हैं।
