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मां-बेटी का ब्लड ग्रुप नहीं मिला, डॉक्टरों ने पूरा खून बदलकर बचाई नवजात की जान; 9 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटी

 
मां-बेटी का ब्लड ग्रुप नहीं मिला, डॉक्टरों ने पूरा खून बदलकर बचाई नवजात की जान; 9 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटी

एक नवजात बच्ची को जन्म के कुछ ही घंटों बाद गंभीर पीलिया (जॉन्डिस) होने पर डॉक्टरों ने समय रहते इलाज कर उसकी जान बचा ली। बच्ची की स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पूरा खून बदलने (एक्सचेंज ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की प्रक्रिया करनी पड़ी। सफल उपचार के बाद नवजात पूरी तरह स्वस्थ हो गई और 9 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी देकर उसे घर भेज दिया गया।

डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के कुछ घंटे बाद ही बच्ची के शरीर में पीलिया तेजी से बढ़ने लगा। जांच के दौरान पता चला कि मां और नवजात के ब्लड ग्रुप में असंगति (Blood Group Incompatibility) के कारण लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो रही थीं। इससे शरीर में बिलीरुबिन का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया।

चिकित्सकों ने बताया कि यदि समय पर उपचार नहीं किया जाता तो अधिक बिलीरुबिन का असर नवजात के मस्तिष्क पर पड़ सकता था, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं या जान का खतरा भी हो सकता था। बच्ची की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल एक्सचेंज ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने का निर्णय लिया।

इस प्रक्रिया के तहत नवजात के शरीर से धीरे-धीरे दूषित रक्त निकालकर उसकी जगह उपयुक्त रक्त चढ़ाया गया। इस उपचार से शरीर में बिलीरुबिन का स्तर नियंत्रित हुआ और बच्ची की हालत में तेजी से सुधार आने लगा। उपचार के दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार उसकी निगरानी की।

अस्पताल में करीब नौ दिन तक चले इलाज के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई। डॉक्टरों ने सभी जरूरी जांच के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया। बच्ची के स्वस्थ होकर घर लौटने पर परिवार ने डॉक्टरों और चिकित्सा टीम का आभार जताया।

विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात में जन्म के बाद हल्का पीलिया सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि बिलीरुबिन का स्तर तेजी से बढ़ने लगे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे मामलों में समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि जन्म के बाद यदि नवजात की त्वचा या आंखें अधिक पीली दिखाई दें, बच्चा सुस्त रहे या दूध कम पीए, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर इलाज से अधिकांश मामलों में बच्चे को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है।

इस सफल उपचार ने एक बार फिर आधुनिक चिकित्सा और डॉक्टरों की तत्परता का उदाहरण पेश किया है। समय पर सही निर्णय और विशेषज्ञ उपचार की बदौलत नवजात को नई जिंदगी मिली और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवार के साथ घर लौट सकी।