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राजस्थान की कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को अनुदान में देरी, 500 इकाइयां प्रभावित, कई फाइलें लंबित

 
राजस्थान की कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को अनुदान में देरी, 500 इकाइयां प्रभावित, कई फाइलें लंबित

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 के तहत स्थापित औद्योगिक इकाइयों को समय पर अनुदान नहीं मिलने का मामला सामने आया है। प्रदेश में करीब 500 ऐसी इकाइयां हैं, जिन्हें अब तक दूसरी और तीसरी किस्त का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।

नीति के तहत प्रावधान है कि अनुदान की किस्तें चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती हैं, लेकिन प्रक्रिया में देरी के कारण कई इकाइयों को वर्षों से भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जब तक अंतिम किस्त जारी नहीं होती, तब तक पहली और दूसरी किस्त का पूरा लाभ भी प्रभावित रहता है।

सूत्रों के अनुसार, 150 से अधिक फाइलें ऐसी हैं, जो अभी तक राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी (SLSC) की बैठक में भी नहीं रखी गई हैं। इससे अनुदान प्रक्रिया और अधिक धीमी हो गई है और उद्यमियों में नाराजगी बढ़ रही है।

कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि अनुदान में देरी से उनकी वित्तीय योजना प्रभावित हो रही है। कई इकाइयों ने बैंक ऋण लेकर निवेश किया है, लेकिन समय पर सरकारी सहायता नहीं मिलने से उन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि लंबित फाइलों का जल्द निस्तारण किया जाए और किस्तों के भुगतान की प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि नई इकाइयों के निवेश को भी बढ़ावा मिल सके।

अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में दस्तावेजों की जांच और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई है, लेकिन अब फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज करने पर काम किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अनुदान समय पर जारी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल निवेश बढ़ता है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।

फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा के दायरे में है और जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।