नागौर में लेबर इंस्पेक्टर कुलदीप यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों की ACB जांच शुरू, विभागीय स्वीकृति के बाद कार्रवाई
नागौर में श्रम विभाग में लंबे समय तक कार्यरत रहे लेबर इंस्पेक्टर कुलदीप यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप अब गंभीर जांच के दायरे में आ गए हैं। विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में प्राथमिक जांच (पीई) शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के अनुसार, कुलदीप यादव के खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए जा रहे थे। शिकायतों में आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों के विपरीत कार्य किए और आर्थिक अनियमितताएं कीं। इन शिकायतों के आधार पर मामले की प्रारंभिक समीक्षा की गई, जिसके बाद विभागीय स्तर पर जांच की अनुमति प्रदान की गई।
विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच शुरू करते हुए संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करना शुरू कर दिया है। जांच के दौरान अधिकारी लेन-देन, संपत्ति और पद पर रहते हुए किए गए कार्यों की विस्तृत पड़ताल करेंगे। यदि प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो एसीबी द्वारा नियमित मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। इसके लिए संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में चर्चा का माहौल है। एसीबी की जांच को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में एसीबी लगातार सक्रिय है और शिकायत मिलने पर जांच कर रही है। नागौर में लेबर इंस्पेक्टर के खिलाफ शुरू की गई यह जांच भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
फिलहाल एसीबी की प्राथमिक जांच जारी है और आने वाले समय में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
